पीजी कॉलेज का पहला मॉडल हॉस्टल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से 15 साल पहले रजगामार रोड पर 25 लाख रुपए की लागत से निर्माण कराया गया था।
कोरबा. जिले के लीड कॉलेज में हॉस्टल के नाम पर दो दशकों में तीन-तीन इमारतें तान दी गईं। लेकिन विडंबना यह है कि अब तक एक भी छात्र कॉलेज के हॉस्टल में नहीं रह सका है और ना तो किसी भी छात्र को हॉस्टल के नाम पर एक भी कमरे का एलॉटमेंट किया गया। पीजी कॉलेज का पहला मॉडल हॉस्टल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सहयोग से 15 साल पहले रजगामार रोड पर 25 लाख रुपए की लागत से निर्माण कराया गया था।
100 सीटों वाले इस हॉस्टल का शुभारंभ ८ मई, 1997 को अविभाजित मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर ने किया था। हॉस्टल शुरू होने के पहले ही कोरबा में नए कलेक्ट्रेट भवन की आवश्यकता हुई, जिसे देखते हुए सरकार ने हॉस्टल को कलेक्ट्रेट के रूप में तब्दील कर दिया। फिर इसमें आरटीओ ऑफिर का संचालन हुए, फिर आरसेटी और वर्तमान में एनसीसी को सौंप दिया गया है।
पीजी कॉलेज में तीसरे हॉस्ट का निर्माण दो करोड़ २७ लाख की लागत से २०१-१६ में शुरू हुआ। इस १०० सीटर गल्र्स हॉस्टल को कॉलेज ने हैण्डओवर ले लिया है। लेकिन इसके लिए हॉस्टल वार्डन, आया व अन्य पदों के सेटअप का इंतजार है। पलंग, आलमारी जैसे सामान भी नहीं मिले हैं। राज्य शासन से स्वीकृत इस हॉस्टल का हाल भी अन्य दोनो हॉस्टलों की तरह ही है। जबकि पीजी कॉलेज में आने वाले छात्र किराए के भवन में रहने को मजबूर हैं, पर कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा है।
चार साल पहले निर्मित 50 सीटर हॉस्टल का अब तक हैंडओवर नहीं
कॉलेज कैंपस के भीतर अब से चार वर्ष पूर्व २०१३ में ही गल्र्स हॉस्टल का निर्माण शुरू हुआ। ९० लाख की लागत से यूजीसी द्वारा इस हॉस्टल को स्वीकृति मिली। कई दिनों तक इसका बाउण्ड्री वॉल नहीं बन पाया। इलेक्ट्रीफिकेशन से लेकर कुछ खामियां अब भी बरकार हैं। जिसके कारण निर्माण एजेंसी द्वारा अब तक इसे कॉलेज को हैण्डओवर नहीं किया जा सका है। जबकि कॉलेज की यह इमारत लगभग पिछले चार वर्षों से बनकर तैयार है। अब तो यह जर्जर होने की स्थिति में है। कागजी प्रक्रिया अब भी जारी है। छात्रों को हॉस्टल का इंतजार बरकरार है।
- कॉलेज में फिलहाल दो-दो गल्र्स हॉस्टल हैं। एक का हैण्डओवर भी लिया जा चुका है। इसके पदों के सेटअप और जरूरी सामानों के लिए उच्च शिक्षा विभाग के साथ ही यूजीसी को कॉलेज से कई दफा पत्र प्रेषित किया जा चुका है। अब यह शासन स्तर का मामला है । डॉ. आरके सक्सेना, प्राचार्य पीजी कॉलेज