
इस राशि से कंपनी गेवरा में कोल हैंडलिंग का काम ठेका कंपनी को सौंपेगी। खदान से कोयला परिवहन का और काम निजी हाथों में सौंपा जाएगा। कोयला कंपनी गेवरा खदान से उत्पादन क्षमता बढ़ाने जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 52 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसे 30 मार्च तक पूरा होने की संभावना है। अगले वित्तीय वर्ष 2023- 24 के लिए कंपनी ने गेवरा से 62 मिलिय टन कोयला खनन के लिए प्रयास करेगी। कंपनी की योजना गेवरा से सालाना कोयला उत्पादन 70 मिलियन टन करने की है। गेवरा प्रोजेक्ट से इतना अधिक कोयला खनन नियमित कर्मचारियों के भरोसे संभव नहीं है। इस कारण कंपनी अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है। खदानों में आउटसोर्सिंग का दायरा लगातार बढ़ा रही है। जेम पोर्टल के जरिए कंपनी ने टेंडर की प्रक्रिया पूरी करने की योजना बनाई है।
160 मिलियन टन खनन
इस बीच कोयला उत्पादन के क्षेत्र में एसईसीएल नया कीर्तिमान गढ़ रहा है। कंपनी ने 160 मिलियन टन कोयला खनन को पार कर लिया है। चालू वित्तीय वर्ष समाप्त होने में पांच दिन बाकी है। उम्मीद है कि कंपनी इस वित्तीय वर्ष में 165 मिलिय टन तक कोयला खनन कर लेगी। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में एसईसीएल ने अपनी खदानों से 180 मिलियन टन कोयला खनन का लक्ष्य रखा है, जो अब मुश्किल है।
खदान में कोई ऐसा काम नहीं जो नियमित मजदूरों के लिए आरक्षित
एसईसीएल की कोयला खदानों में अब कोई ऐसा काम नहीं है, जो नियमित मजदूरों के लिए आरक्षित हो। खदान में ड्रील मारने से लेकर कोयला परिवहन तक निजी हाथों में है। मिट्टी खनन और कोल हैंडलिंग प्लांट में आउटसोर्सिंग की कंपनियां काम कर रही हैं। दीपका में साइलो का संचालन भी निजी कंपनी के हाथों में है। मानिकपुर खदान शत् फीसदी आउटसोर्सिंग पर चल रहा है। कुसमुंडा में आउटसोर्सिंग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। भारी मशीनों की रखरखाव भी ठेके पर है।