विद्युत वितरण व्यवस्था चल रही जुगाड़ के भरोसे
कोरबा. गुरुवार की शाम कुछ ही देर चले अंधड़ से शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था भी पूरी तरह से ठप रही। दर्री जोन के कई क्षेत्रों में जहां पूरी रात बिजली नहीं आई तो वहीं पाली जैसे कुछ ग्रामीण इलाकों में ब्लैक आऊट जैसे स्थिति निर्मित हो गई।
शुक्रवार शाम को गई बिजली शहर व उपनगरीय इलाकों में देर रात लौटी तो कुछ क्षेत्रों में अंधेरा ही छाया रहा। पिछले एक पखवाड़े से जिले में ऐसा कोई दिन नहीं गुजर रहा जब सुबह से लेकर रात तक बिजली गुल ना हुई हो। बिजली की आवाजाही से आम लोगों का जनजीवन अस्त व्यस्त हो जाता है।
व्यवस्था लचर, भुगत रही शहर की जनता
विभाग के कर्मियों के पास फॉल्ट सुधारने के लिए वांछित संसाधनों का भी अभाव है। सुरक्षा उपकरणों से लेकर सामान्य केबल, फ्यूज वायर व डीओ वायर जैसे संसाधन भी उपलब्ध नहीं रहते। ऐसे कई संसाधन हैं जो विभाग के पास मौजूद नहीं होते। जिसे स्थानीय निवासियों की सहायता से जुटाया जाता है। कोरबा में रायगढ़ स्थित केन्द्र से मांग के आधार पर इन सामानों की आपूर्ति की जाती है। लचर विद्युत व्यवस्था के लिए जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता भी एक कारण है।
बिजली की मांग 3200 मेगावाट से अधिक
तकनीकी गड़बड़ी से कोरबा पूर्व व पश्चिम स्थित संयंत्र की दो-दो इकाई उत्पादन से बाहर हो गई है। यूनिट नंबर तीन में ट्यूब लिकेज की समस्या आ गई। इसके साथ ही डीएसपीएम की एक इकाई भी उत्पादन से बाहर हो गई थी। शुक्रवार की शाम प्रदेश में बिजली की मांग 3242 मेगावाट के करीब पहुंच गई। शाम होते- होते मांग में और भी इजाफा हुआ। मांग की पूर्ति के लिए कोरबा स्थित बिजली कंपनी की सभी इकाइयों को चालू रखने पर प्रबंधन जोर दे रहा है।
-ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में पहले की तुलना में स्थिति सुधरी है। आंधी-तूफान के कारण ही व्यवस्था प्रभावित होती है। खराबी आने पर जल्द ही मरम्मत कार्य पूरा कर लिया जाता है।
पीवी संजीव, एसई