
कोरबा. हाथियों के लिए बनाए गए तालाब का पानी बोर से ग्रामीण खींच रहे हैं, तो कई जगह तालाब के आसपास ही बोर कर दिए गए हैं। इससे तालाब का पानी सूखने लगा है। स्त्रोत गिरने की वजह से गर्मी की शुरुआत में ही तालाबों का यह हाल है, ऐसे में आने वाले दिनों मेंं स्थिति और भी खराब हो सकती है।
गर्मी के दिनों में ही जंगलों में हाथियों समेत वन्यजीवों के पानी की व्यवस्था के लिए हाथी रहवास व्यवस्था के तहत सभी हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे जगह का चयन किया गया था जहां हाथी हमेशा आते हैं। उन जगहों को चिन्हित कर वन विभाग द्वारा तालाब का निर्माण कराया गया था। पिछले साल इन तालाब में पानी था। लेकिन अब इनमें से कुछ तालाब मेें पानी सूखने लगा है।
दरअसल तालाब के आसपास अपने खेतों को सिंचित करने के लिए बोर कर पानी खींचा जा रहा है। इससे तालाब का जलस्तर गिरने लगा है। सूखने के कगार पर पहुंच चुके हैं। तालाबों मेंं पानी इतना नहीं बचा है कि आने वाले दो महीने तक रह सके। गर्मी में ये तालाब पूरी तरह से सूख जाएंगे। वन विभाग अब बारिश तक का इंतजार कर रहा है उसके बाद तालाब की गहराई कर पानी भरा जाएगा।
पानी की तलाश में हाथी फिर पहुंचेंगे गांव के आसपास
छोटे नदी-नाले भी अब सूखने लगे हैं। ग्रामीण अपनी प्यास बुझाने के लिए गांव से लगे नालों पर तटबंधन कर काम चला रहे हैं। हाथी अब पानी की तलाश में उन्हीं जगहों पर पहुंचेंगे। कई बार इसी वजह से हाथियों का झुंड गांव तक पहुंच जाता है। इससे हाथियों के हमले भी बढ़ते हैं। ऐसे में आसपास के कई गांव के लिए परेशानी बढ़ेगी।
यहां बनाएं गए थे तालाब
-कुदमुरा में कम्पार्टमेंट नंबर ५४०
-कुदमुरा में कम्पार्टमेंट नंबर ११३१
-करतला में पानचुंवा के जंगल में
-बालको रेंज में छातासराई नाले में
एनीकट में रोक रहे पानी, उसी के भरोसे वन्य जीव
वन विभाग ने पसरखेत रेंज में चार जगह तुमाड़ी मुहानी नाला, महादेव झरिया, चंलाग नाला व सुआकला नाला में एनीकट का निर्माण कराया गया था। इन्हीं एनीकट के भरोसे इस बार वन्य जीव रहेंगेे। बीच में दो एनीकट का गेट टूट गया था। विभाग दो माह पूर्व इसकी मरम्मत कर नई लगवा दी है। १२ माह बहने वाले नाले में पानी बारिश तक के लिए बचा कर रखा गया है।
- तालाब के आसपास बोर कर ग्रामीण खींच रहे हैं। इससे तालाब का पानी कम हो रहा है। हालांकि तालाब अभी नए हैं। एक-दो सीजन के बाद इसमें सिल्ट जमा होने पर पानी ठहरने लगेगा- डीडी बंजारा, रेंजर, कुदमुरा।