कोरबा

HTPP पर 18 करोड़ का जुर्माना! हसदेव नदी प्रदूषण मामले में बड़ी कार्रवाई, जांच में हुआ खुलासा

HTPP penalty: हसदेव नदी में राखड़ युक्त पानी छोड़कर प्रदूषण फैलाने के मामले में दर्री स्थित एचटीपीपी पर जल संसाधन विभाग ने 18 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। जांच में लापरवाही की पुष्टि के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है।

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Apr 14, 2026
HTPP पर 18 करोड़ का जुर्माना! हसदेव नदी प्रदूषण मामले में बड़ी कार्रवाई, जांच में हुआ खुलासा(photo-patrika)

HTPP penalty: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के दर्री स्थित हसदेव ताप विद्युत परियोजना (HTPP) पर नदी में राखड़ युक्त पानी छोड़ने के मामले में जल संसाधन विभाग ने 18 करोड़ रुपये से अधिक का भारी जुर्माना लगाया है।

HTPP penalty: हसदेव नदी में प्रदूषण पर गंभीर आरोप

हसदेव नदी को संरक्षित करने के प्रयासों के बीच एचटीपीपी प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। आरोप है कि संयंत्र द्वारा नदी के पानी में राखड़ (फ्लाई ऐश) मिश्रित कर प्रदूषण फैलाया जा रहा था, जिससे नदी का जल स्तर और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रहे थे।

औद्योगिक इकाइयों और निगम को भी हो रही परेशानी

नदी में बढ़ते प्रदूषण का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले के अन्य औद्योगिक संयंत्रों के संचालन में भी दिक्कतें आने लगीं। नगर निगम के जल शोधन संयंत्रों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिससे शुद्धिकरण प्रक्रिया बाधित होने लगी।

जल संसाधन विभाग की सख्त कार्रवाई

स्थिति गंभीर होने पर जल संसाधन विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच कराई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि एचटीपीपी प्रबंधन द्वारा नदी में राखड़ मिश्रित पानी छोड़ा जा रहा था। इसके बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 18 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया।

पहले भी दी जा चुकी थी चेतावनी

अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में प्रबंधन को पहले भी दो बार चेतावनी दी जा चुकी थी। नगर निगम आयुक्त ने भी पूर्व में कटघोरा एसडीएम को पत्र लिखकर नदी में हो रहे प्रदूषण को तत्काल रोकने के निर्देश दिए थे, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

हसदेव नदी संरक्षण पर उठे सवाल

एक तरफ हसदेव नदी को बचाने और संरक्षण के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर औद्योगिक लापरवाही के कारण नदी का प्रदूषण बढ़ने से पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आगे की कार्रवाई पर नजर

इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर और कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और सख्त नियमों के पालन की जरूरत है, ताकि नदियों को प्रदूषण से बचाया जा सके।

Updated on:
14 Apr 2026 09:03 am
Published on:
14 Apr 2026 09:02 am
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