इमलीडुग्गू पोखरी और तालाब का भी हाल बुरा
अप्रैल बीत चुका है। मई से पारा फिर चढ़ेगा। इमलीडुग्गू और सीतामणी वार्ड में दो तालाब है। नवीन हाइस्कूल इमलीडुग्गू के सामने डंपिंग के पास तालाब है। वहीं नहर के पास एक छोटा सा तालाब है।
इन दोनों ही तालाब पर यहां के वार्डवासी निस्तारी के लिए निर्भर है। लेकिन इन तालाबों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब सिर्फ पशुओं को नहलाने के उपयोग आ रहा है। पानी सूखने लगा है। तालाब के नीचे लाद इतना अधिक हो गया है कि इसकी गहराई कम हो गई है। वहीं तालाब का मुहाना अब कम होते जा रहा है।
तालाब सूखने लगा है। लोगों ने दोनों तालाब के लिए जनदर्शन में मांग की। उसके बाद कुछ पहल हुई। इस तालाब को लेकर दो साल पहले लगभग दो करोड़ रूपए का प्रस्ताव बनाकर स्टीमेट तैयार किया गया था। लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फंड की कमी की वजह बताकर ना तो टेंडर किया गया ना ही काम शुरू कराया गया।
नगर निगम के पास भले तालाब के सौन्द्रयीकरण के लिए फंड नहीं है। लेकिन सफाई के लिए पर्याप्त संसाधन व अमला भी है। लेकिन सफाई को लकर सुध नहीं ली जा रही है। ऐसे तालाब जहां सफाई कराना आसान है वहां सफाई कराने से आने वाली बारिश में तालाब लबालब हो सकता था।
नहा रहे जान जोखिम में डालकर
इधर तालाब गंदा होने पर वार्डवासियों केा जान जोखिम में डालकर नहर में नहाना जाना पड़ रहा है। शनिमंदिर के सामने से बहने वाले नहर पर ही दोनों वार्ड के लोग निस्तारी के लिए सबसे अधिक निर्भर रहते हैं। कई बार नहाते समय हादसे हो चुके हैं। वार्ड वासियों की मांग है कि तालाब की सफाई कराया जाएं जिससे उपयोग किया जा सके।
रायपुर से पहुंची थी टीम, हुआ था सर्वे
इमलीडुग्गू पोखरी को अधोसंरचना मद से काम कराने के लिए रायपुर से टीम भी पहुंची थी। टीम ने तालाब का सर्वे भी किया था। वार्डवासियों की उम्मीद जागी थी कि बहुत जल्द मद से स्वीकृति के बाद काम शुरू होगा। लेकिन मुख्यालय ने इसे स्वीकृति नहीं दी। इस वजह से काम शुरू नहीं हो सका।