
कोरबा जिले में कुल 61 हजार मजदूरों का बीमा
कोरबा . श्रम विभाग ने कोरबा जिले में कुल 61 हजार मजदूरों का बीमा कराया है लेकिन साल भर में सिर्फ 35 मजदूरों को ही इसका लाभ मिल सका जबकि श्रमिकों की मानें तो आए दिन किसी न किसी संंयंत्र या फिर खदान में मजदूर हादसे का शिकार हो रहे हैं। दरअसल विभाग तक सिर्फ बड़े हादसे ही पहुंचते हैं।
छुटपुट हादसों को वहां तक पहुंचने से पहले ही दबा दिया जाता है। ऊर्जाधानी में खदानों के बाद उद्योगों की स्थापना हुई। उद्योगों में काम करने वाले ठेका मजदूरों की संख्या सबसे अधिक है। लेकिन इन्हीं मजदूरों का सबसे अधिक शोषण होता है।
दरअसल ठेकेदार पेटी ठेकेदार के अंतर्गत इन्हें रखकर आधे से भी कम वेतन दिया जा रहा है। न ही अन्य कोई सुविधा। जनदर्शन में एक दर्जन से ज्यादा बार यह शिकायत आ चुकी हैं कि ठेकेदार पैसा लेकर भाग गया। लेकिन उनको वेतन नहीं मिला। ऐसे मामलों मेें कभी ठेकेदारों पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
खदानों व संयंत्रों में बगैर सुरक्षा उपकरणों के 12-12 घंटे काम करनेे वाले मजदूरों की स्थिति बेहद तंगहाल है। समय पर यहां तक उनको छुटट्ी तक नहीं दी जाती। मजदूर एक ठेकेदार से काम छोड़कर दूसरी जगह काम के लिए जाता है। लेकिन मजदूर स्थिति जस की तस रहती है।
जिले के सभी उद्योगों व खदानों में श्रमिकों की समस्या लगभग एक जैसी है। खदान में नियमित कर्मचारियों से श्रम कानून का पालन किए बगैर काम कराया जा रहा है। आएदिन खदानों में हादसे होते रहते हैं। ठेका कर्मियों को वेतन कम दिया जा रहा है। वहीं संयंत्रों में विद्युत उत्पादन कंपनी में कर्मचारियों की सख्त कमी है। लगातार वीआरएस और सेवानिवृत के बाद ठेका मजदूरों के भरोसे काम चल रहा है। चार की जगह एक श्रमिक से काम लिया जा रहा है।
इधर संयंत्रों में कम वेतन दिया जा रहा है। आईटीआई होल्डर और इंजीनियरिंग करने वाले युवाओं को एक समान वेतन दिया जा रहा है। वो भी किसी ठेकेदार के अन्तर्गत ही काम कर रहे हैं। मई दिवस के अवसर पर जगह-जगह रैली, सभाएं आदि का आयोजन किया जाएगा।
इन क्षेत्रों के मजदूर भी शोषित
-शहर के दुकानों व गोदाम में काम करने वाले मजदूर
-प्राइवेट ठेकेदारों के अन्तर्गत काम करने वाले 5 हजार मजदूर
-खदानों में कार्यरत प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड, अन्य ठेका श्रमिक
75 फीसदी मजदूरों के पास इपीएफ नंबर नहीं
75 फीसदी मजदूरों के पास उनका इपीएफ नंबर ही नहीं है। ठेकेदार मजदूरों को यह जानकारी तक नहीं देते ही उनके वेतन से कटने वाली राशि कहां जमा हो रही है। दरअसल ठेकेदार मजदूर के वेतन से पीएफ की राशि तो काट लेता है लेकिन उसे जमा नहीं करता। इधर सार्वजनिक उपक्रमों में अब ठेकेदारों को श्रमिकों के खाते में डाले जाने वाले राशि की जानकारी देनी है। लेकिन इस नियम के बाद भी ठेकेदार गड़बड़ी कर रहे हैं।
जांच के बाद कार्रवाई
श्रम कानून के पालन के साथ काम कराया जाता है। कहीं से भी किसी प्रकार की शिकायत आती है तो उसपर जांच के बाद कार्रवाई होती है। सरकार द्वारा चलाएं जा रहे सभी योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है।
-विकास सरोदे, सहायक श्रम आयुक्त, कोरबा
Published on:
01 May 2018 10:59 am
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