CG Suspended News: कोरिया जिले के केशगवां ग्राम पंचायत में 3 लाख रुपये के कथित गबन और फर्जी आहरण के मामले में पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया गया है।
CG Suspended News: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में जिला पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत केशगवां में वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। 15वें वित्त आयोग की करीब 3 लाख रुपये की राशि के कथित फर्जी आहरण और गबन के आरोपों के बाद पंचायत सचिव श्यामलाल सूर्यवंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच समिति ने मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान संबंधित सचिव न तो उपस्थित हुए और न ही आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए, जिससे उनके खिलाफ संदेह और गहरा गया। समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि ‘ई-ग्राम स्वराज’ पोर्टल पर सरपंच के यूजर प्रोफाइल में सचिव का मोबाइल नंबर दर्ज था। इससे प्रथम दृष्टया यह संकेत मिला कि सरपंच के डिजिटल हस्ताक्षर (डीएससी) का दुरुपयोग कर राशि निकाली गई। यह कृत्य गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
प्रकरण में छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 और ग्राम पंचायत नियम 1999 के उल्लंघन की पुष्टि होने पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत सचिव को निलंबित किया गया है। उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन तथा अपील) नियम 1999 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निलंबन अवधि के दौरान श्यामलाल सूर्यवंशी का मुख्यालय जनपद पंचायत सोनहत निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उपसंचालक (पंचायत), जिला कोरिया को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि जनपद पंचायत सोनहत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। विभागीय जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
निलंबन के बाद पंचायत कार्यों में व्यवधान न आए, इसके लिए प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। ग्राम पंचायत केशगवां का अतिरिक्त प्रभार शिवनारायण साहू को तथा बसवाही का प्रभार रामप्रकाश साहू को अस्थायी रूप से सौंपा गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस कार्रवाई को पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करने के रूप में देखा जा रहा है।