कोरीया

किशोरी को धोखे से बुलाकर किया था बलात्कार, कोर्ट ने सुनाई 20 साल सश्रम कारावास की सजा

Minor girl raped: पीडि़ता के गांव आना-जाना करता था आरोपी, पहचान बढ़ाकर मोबाइल से करने लगा था बात, शादी करूंगा कहकर ले गया साथ और सूनसान मकान में किया था बलात्कार

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Fast track court Manendragarh

बैकुंठपुर. Minor girl raped: जून 2021 में नाबालिग लडक़ी को धोखे से नदी किनारे बुलाकर एक युवक ने बलात्कार किया था। इस मामले में अपर सत्र न्यायालय एफटीसी पॉक्सो मनेंद्रगढ़ ने आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। वहीं अर्थदंड भी लगाया है। दरअसल आरोपी ने नाबालिग को शादी करने का झांसा देकर पहले तो नदी किनारे बुलाया और फिर साथ ले जाकर सूनसान मकान में वारदात को अंजाम दिया था। पीडि़ता के पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।


विशेष लोक अभियोजक जीएस राय के मुताबिक आरोपी शिवभजन सिंह उर्फ गोलू (20) पीडि़ता के गांव आना-जाना करता था। ऐसे में पीडि़ता से उसकी जान-पहचान हो गई और वह उससे बातचीत करने लगा था। इसी बीच आरोपी पीडि़ता से प्रेम करने लगा और शादी करने की बात कहता था।

दोनों की मोबाइल से भी बातचीत होती थी। घटना तिथि 16 जून 2021 को आरोपी ने पीडि़ता को फोन कर गांव के नजदीक नदी किनारे जरूरी काम का बहाना बनाकर बुलाया था।

पीडि़ता शाम करीब 4 बजे नदी किनारे मिलने पहुंची तो आरोपी ने कहा कि तुमसे प्यार करता हूं, शादी कर अच्छे से रखूंगा, तुझे लेने आया हूं। एक ही जाति के हैं, कोई दिक्कत नहीं होगी।

आरोपी की बातों में पीडि़ता आ गई और आरोपी के साथ पैदल चली गई। इसी बीच रात को एक पुराने खाली घर में दोनों रुक गए थे। यहां आरोपी ने पीडि़ता के साथ बलात्कार किया। दूसरे दिन नाबालिग को उसने जंगल में रखा और 18 जून 2021 को उसे अपने घर लेकर चला गया था।


पीडि़ता के पिता ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
पीडि़ता के पिता की रिपार्ट पर आरोपी के खिलाफ धारा 363, 366, 376(2)(ढ़) व अधिनियम की धारा ६ के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया। मामले में जांच रिपोर्ट अपर सत्र न्यायालय एफटीएससी पॉक्सो मनेंद्रगढ़ सौंपी गई थी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई कर आरोपी को 20 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

इसमें धारा 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 20 साल, धारा 366 में 5 साल, धारा 363 में 2 साल सश्रम कारावास की सजा मिली है। साथ ही तीनों धाराओं में 500-500 रुपए अर्थदंड लगाया गया है।


प्रतिकार राशि देने विधिक सेवा प्राधिकरण को अनुशंसा भेजी
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि घटना के परिणाम स्वरूप पीडि़ता को हुई शारीरिक, मानसिक पीड़ा की प्रतिपूर्ति किया जाना संभव नहीं है। परंतु पीडि़ता के साथ हुए घटना में प्रकरण की स्थिति को ध्यान में रखकर पीडि़ता के पक्ष में प्रतिकर देने की अनुशंसा किया जाना आवश्यक है।

पीडि़ता को प्रक्रिया का पालन कर नियमानुसार प्रतिकर देने की अनुशंसा की जाती है। मामले में फैसले की एक कॉपी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बैकुंठपुर को भेजी गई है।

Published on:
29 Dec 2023 08:24 pm
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