
योगेश चंद्रा/बैकुंठपुर।कोरिया वनमंडल अंतर्गत लंबे समय से बड़ी धांधली चल रही है, लेकिन ऊपर बैठे अधिकारियों ने मौन सहमति दे रखी है। दरअसल राजस्व रेकॉर्ड में सफेदा लगाकर 5-6 दशक पुराने वन विभाग की बेशकीमती जमीन सहित 6 क्वार्टर थर्ड पार्टी ने हथियाकर अपने नाम (Koria forest bungalow scam) करवा लिया है। इससे पहले पुराने रेंजर बंगला को तोडक़र तत्कालीन एसडीओ (अब आईएफएस ऑफिसर) ने अपना मकान खड़ा कर लिया है, लेकिन विभाग के लोग कार्रवाई की जगह सिर्फ पत्र-पत्र खेल रहे हैं। विभाग उक्त अफसर से पैनल रेंट भी नहीं वसूल पा रहा है। मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है।
कोरिया वनमंडल बैकुंठपुर का अविभाजित मध्यप्रदेश में 1952 में गठन हुआ है। राजस्व विभाग से खसरा नंबर 391/2, रकबा 0.0400 हेक्टेयर जमीन आवंटन के बाद करीब 5-6 दशक पहले भट्ठीपारा खुटनपारा रोड किनारे फॉरेस्ट आवास निर्माण कराया गया था। इसमें एच-टाइप रेंजर बंगला और 6 क्वार्टर स्टाफ के लिए बनवाए गए थे।
वर्तमान में जर्जर होने के कारण यहां कोई स्टाफ निवास नहीं करते हैं। लेकिन ये क्वार्टर राजस्व रेकॉर्ड में सफेदा लगा छेड़छाड़ कर थर्ड पार्टी के नाम दर्ज हो गया है। ऐसे में थर्ड पार्टी ने स्टाफ क्वार्टर सहित जमीन पर कब्जा जमाने तोडफ़ोड़ शुरू किया है। मामले (Ranger bungalow scam) में वन विभाग अब तहसील से लेकर एसडीएम कार्यालय तक दौड़ लगा रहा है।
वनपरिक्षेत्राधिकारी बैकुंठपुर आवास के नाम से निर्मित एच-टाइप बंगला धरातल से गायब हो गया है। वन अमला पिछले करीब 17 साल से रेकॉर्ड लेकर गायब पुराने बंगले की तलाश में जुटा हुआ है। साथ ही डेढ़ दशक से बंगला खाली कराने, पैनल रेंट वसूलने सीसीएफ (CCF) को सिर्फ पत्र लिख रहा है। फिलहाल पुराने सरकारी बंगले की जगह नई प्राइवेट बिल्डिंग खड़ी है।
बैकुंठपुर के भट्ठीपारा में वन विभाग की सरकारी जमीन पर परिक्षेत्राधिकारी उत्पादन निवास बैकुंठपुर के नाम से सरकारी बंगला (एच-टाइप) निर्माण कराया गया था। इसका क्षेत्रफल 108 वर्ग फीट है। इसमें वर्ष 2000 से पहले तत्कालीन वनपरिक्षेत्राधिकारी वाईपी मिश्रा निवास करते थे।
मामले में तत्कालीन डीएफओ आरबी सिन्हा ने परिक्षेत्राधिकारी बंगला खाली होने के बाद तत्कालीन एसडीओ लक्ष्मण सिंह को आवंटित कर दी थी। फिर उनका वर्ष 2008 में अचानकमार टाइगर रिजर्व (Achanakmar Tiger reserve) तबादला हुआ था। मामले में वर्ष 2009 में नोटिस जारी कर 7 दिन के भीतर खाली करने नोटिस जारी हुआ था।
इसी बीच सहायक वन संरक्षक का बीजापुर आवापल्ली, फिर एसडीओ फॉरेस्ट पत्थलगांव (जशपुर वनमण्डल) तबादला हुआ था। लेकिन तत्कालीन एसडीओ ने पुराने रेंजर बंगले को तोडक़र अपनी प्राइवेट बिल्डिंग खड़ी कर दी। तत्कालीन डीएफओ ने नवंबर 2012 को बंगला खाली कराने फिर नोटिस जारी किया था। फिलहाल वन अमला पिछले एक दशक से एसडीएम, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा को पत्र लिख रहा है।
तत्कालीन एसडीओ का एसडीओ फॉरेस्ट (Then SDO Laxman Singh) आवापल्ली बीजापुर वनमण्डल में तबादला होने के बाद 10 जनवरी 2012 को भारमुक्त कर दिया गया था। लेकिन रेंजर बंगला खाली नहीं करने के कारण पहली बार वर्ष 2009 में आदेश जारी कर अक्टूबर 2006 से 2009 तक कुल 34 माह का पैनल रेंट कुल 1 लाख 36000 रुपए वसूलने नोटिस जारी किया गया था।
वहीं दूसरी बार अक्टूबर 2015 में पैनल रेंट वसूलने आदेश हुआ था। अवैध तरीके से रेंजर बंगला में रहने पर जुलाई 2012 से नवंबर 2015 तक बाजार भाव (पैनल रेंट) वसूलने और तीसरी बार जून 2016 में आदेश जारी कर हर महीने तनख्वाह से 8700 रुपए वसूलने आदेश दिया गया था। बावजूद सरकारी बंगले (Government bungalow) को खाली नहीं करा पाए और न ही पैनल रेंट वसूल पाए।
बैकुंठपुर वनमंडल के डीएफओ (Koria DFO) प्रभाकर खलखो का कहना है कि राजस्व रेकॉर्ड में छेड़छाड़ कर वन विभाग की जमीन को थर्ड पार्टी के नाम पर दर्ज कराया गया है। जहां वर्षों पहले 6 स्टाफ क्वार्टर निर्मित है। इससे पहले उसी जमीन पर रेंजर बंगला का भी प्रकरण लंबित है। इसमें वन अधिकारी लक्ष्मण सिंह ने खुद का मकान निर्माण कराया है। मामले में हमने एसडीएम कोर्ट से स्टे ले लिया है।