कोटा. मणप्पुरम् गोल्ड लोन कार्यालय में 27 किलो सोना लूट की वारदात के बाद कार्यालय में सुरक्षा की जांच की गई तो पाया कि...
कोटा.
मणप्पुरम् गोल्ड लोन कार्यालय में 27 किलो सोना लूट की वारदात के बाद कार्यालय में सुरक्षा की जांच के लिए फाइनेंस कम्पनी व सुरक्षा एजेंसी के अधिकारी मंगलवार को कोटा पहुंचे। उन्होंने पूरे दिन कार्यालय में सुरक्षा इंतजाम देखे। यहां आने वाले हर ग्राहक व व्यक्ति से पूछताछ की। सुरक्षा व्यवस्था के दौरान उन्होने पाया कि सुरक्षा करने वाले गार्ड को सुरक्षा करने की जगह नाम-पता नोट करने का काम सौंपा हुआ है। इधर, लूट की खबर के बाद सोना रखने वाले ग्राहकों का तांता कंपनी कार्यालय पर मंगलवार को लगा।
कम्पनी व गार्ड उपलब्ध कराने वाली सुरक्षा एजेंसी पैंथर के अधिकारी केरला व अहमदाबाद से कोटा आए और उन्होंने दिनभर अंदर कार्यालय की जांच की। वहीं सुरक्षा एजेंसी के कुछ कर्मचारी कार्यालय के बाहर ही खड़े होकर आने-जाने वाले से पूछताछ करते रहे। बाहर से आए अधिकारी मीडिया से बात करने से बचते रहे।
बड़ी कमजोरी: गार्ड का काम नाम पते नोट करना
कम्पनी में सीढिय़ां चढ़ते ही गार्ड के रूप में बिना हथियार के एक कर्मचारी बबलू गुर्जर को तैनात किया हुआ है। वह पैंथर कम्पनी के मार्फत 15 जनवरी से ही यहां तैनात है। वारदात के समय भी वह वहीं था। वह सिर्फ अंदर आने-वाले ग्राहकों का नाम पता नोट करने का काम करता है।
बड़ा सवाल: हर आने-जाने के बाद ताला
फाइनेंस कम्पनी के सुरक्षा इंतजाम को धता बता लुटेरे आसानी से वारदात को अंजाम दे गए। कम्पनी में सीढिय़ों पर ही सीसीटीवी लगा है। आने वालों के नाम पते व मोबाइल नम्बर व कारण लिखने के बाद गार्ड चैनल गेट पर लगी घंटी बजाता है। इसके बाद ऊपर से दूसरा कर्मचारी आकर ग्रिल गेट का ताला खोलता है। व्यक्ति को अंदर लेकर हाथों-हाथ फिर ताला लगा दिया जाता है। जब व्यक्ति बाहर निकलता है तब ताला खोला जाता है। इसके बावजूद लुटेरे वारदात को अंजाम दे गए।
बड़ी चिंता : ग्राहकों का तांता
इधर, कम्पनी में लूट की जानकारी मिलते ही जिन ग्राहकों का सोना वहां गिरवी रखा हुआ था, उनका कार्यालय पर तांता लगा रहा। ग्राहक आकर अपने सोने की जानकारी करते रहे। कम्पनी कर्मचारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनका सोना इंश्योर्ड है। सभी को फोन कर पूरा सोना लौटाया जाएगा।
दावा: ग्राहकों का हित पूरी तरह सुरक्षित
मणप्पुरम् फाइनेंस लिमिटेड के प्रबंधन ने कहा कि स्वर्ण आभूषण बीमित हैं। प्रबन्धन ने ग्राहकों को विश्वास दिलाया कि उनका कोई नुकसान नहीं होगा और उनके सोने के मूल्य के बराबर का सोना उन्हें दिया जाएगा।