
कोटा. अपनी पौत्री की उम्र की बालिका से उसकी मां के इलाज में पैसे दिलाने के नाम पर दुष्कर्म करने के दोषी साठ साल के हरिराम को कोटा की पोक्सो अदालत ने चालान पेश होने के मात्र पांच दिन बाद ही सोमवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अचरज की बात यह कि इंसाफ दिलाने की जिम्मेदारी उठाने वाली पुलिस एक बार तो इस मामले में एफआर लगा चुकी थी। बाद में आए नए थानाधिकारी ने मामले की जांच दुबारा शुरू कराई और उसे अंजाम तक पहुंचाने में मदद की। दोषी पर पचास हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
नयापुरा वृत्त निरीक्षक विजयशंकर शर्मा ने बताया कि 13 अक्टूबर 2017 को जेके लोन चिकित्सालय में एक गर्भवती महिला को भर्ती हुई थी। उसकी 10 व 8 वर्षीया दो पुत्रियां उसके साथ थीं।
इस दौरान छावनी रामचन्द्रपुरा निवासी हरिराम उर्फ पप्पू गुर्जर (60) 10 वर्षीय बालिका को उसकी मां के बेहतर उपचार के लिए रुपए का इंतजाम करवाने के नाम पर ट्रेन से लाखेरी ले गया तथा जंगल में ले जाकर उससे दुष्कर्म किया। बालिका किसी तरह वहां से भाग निकली तथा लाखेरी स्टेशन पहुंचकर लोगों को आपबीती बताई। इस पर उन्होंने उसे ट्रेन में बैठाकर कोटा भेज दिया।
इधर अस्पताल में उसकी मां की उपचार के दौरान मौत हो गई। अस्पताल की चौकी पर तैनात कांस्टेबल अनिल व किशन मौके पर पहुंचे तो 8 वर्षीय बालिका ने उसकी बड़ी बहन को हरिराम के साथ रुपए का इंतजाम करने के लिए जाना बताया। इस पर पुलिस ने कांस्टेबल किशन की रिपोर्ट पर अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बालिका की तलाश शुरू की। इसी दौरान 10 वर्षीय बालिका लौट आई। पुलिस ने बालिका के 164 के बयान के आधार पर आरोपी हरिराम के खिलाफ दुष्कर्म व अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन बाद में 17 दिसम्बर 2017 को मामले में एफआर लगा दी।
इस मामले में पुलिस ने एक बार फिर जांच शुरू की और आरोपी हरिराम को 22 मई 2018 को गिरफ्तार कर 20 अगस्त को चालान पेश किया। न्यायाधीश ने 21, 23 व 24 अगस्त को लगातार 19 गवाहों के बयान लेखबद्ध किए और सोमवार को आरोपी को शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास व 50 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।