
- सारस की काव्य गोष्ठी सम्पन्न
बारां. साहित्य रसिक समिति सारस द्वारा मंगलवार को सारस कार्यालय पर गुरू ज्ञान, संस्कार और जीवन आलोक विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कवि जगदीश जलजला नें की स संचालन श्याम अंकुर नें किया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां शारदा के पूजन अर्चन के बाद नाथूलाल निर्भय नें काव्य वंदना प्रस्तुत की पुरोधा कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कविता का वाचन कवि ब्रजेश नें किया, गुरू पूर्णिमा पर विचार व्यक्त करते हुए ब्रज भूषण चतुर्वेदी ब्रजेश नें कहा की प्रत्येक मानव के जीवन मे गुरु होना आवश्यक है। गुरू ही हमें पथ प्रदर्शक बनकर हमारे जीवन के मार्ग को सही दिशा दिखाता है। विभिन्न क्षेत्रों के मार्गदर्शक अलग-अलग हो सकते हैं।
इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में ओम साहू, नाथूलाल निर्भय, श्याम अंकुर, ब्रजभूषण चतुर्वेदी, जगदीश जलजला नें सरस रचना पाठ किया। इसी दौरान उन्होंने अपनी नव प्रकाशित पुस्तक भी रचनाकारों को भेंट की गोष्ठी की व्यवस्थाओं में सुधारानी चतुर्वेदी नें सहयोग किय।
गोष्ठी में वक्ताओ ने कहा कि अत्याचार, विषमताए और विद्रुपताओं से लडऩे के लिए हमेशा युवा तरुणाई आगे आती है। नव पीढ़ी को विध्वंस की भावना को त्यागकर निर्माण की भावना बनानी चाहिए। साहित्यकारों का कर्तव्य है कि वह युवाओ का मार्गदर्शन करे। मानवता, राष्ट्र एवं विश्व शांति, गुरु के बिना व्यक्तित्व का निर्माण असंभव ।