कोटा

निगम के सहायक लेखाधिकारी समेत 7 के खिलाफ एसीबी ने किया चालान पेश

पद का दुरुपयोग व कूटरचित दस्तावेजों से सरकारी राशि के गबन का 16 साल पुराना मामला
2 min read
Jul 02, 2018
nagar nigam
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कोटा.कच्ची बस्ती सुधार कार्यक्रम के तहत बिना निर्माण कार्य किए एक निजी फर्म के संवेदक द्वारा नगर निगम के अधिकािरयों से मिलीभगत कर कूटरचित दस्तावेज के आधार पर 3.37 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया। करीब 16 साल पुराने इस मामले में एसीबी ने निगम के तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी समेत अन्य कर्मचारियों व फर्म के संवेदक समेत 7 जनों के दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ पद का दुरुपयोग व सरकारी राशि के गबन मामले में सोमवार को अदालत में चालान पेश किया।

मामले के अनुसंधान अधिकारी एसीबी बूंदी के उप अधीक्षक तरुणकांत सोमानी ने बताया कि कच्ची बस्ती सुधार कार्यक्रम के तहत वर्ष 2001 में नगर निगम को संजय नगर व विज्ञान नगर में नाली व पटान निर्माण कार्य करवाना था। जिसके लिए मैसर्स जन स्वास्थ्य रोजगार प्रशिक्षण संस्थान जयपुर के संवेदक उमेश कुमार सिंह को कार्य कराने का ठेका नगर निगम ने दिया। लेकिन उसने कुछ काम किया और कुछ अधूरा छोड़ दिया। इसके बावजूद उसने निगम के कनिष्ठ अभियंता राजेश कुमार जिनकी देखरेख में यह काम किया गया था, बिलों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए और करीब 3 लाख 37 हजार 230 रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया। इसकी शिकायत होने पर एसीबी कोटा के तत्कालीन एएसपी यशपाल शर्मा ने मामले की जांच की। जांच में पाया कि उमेश कुमार ने निगम के तत्कालीन कनिष्ठ लिपिक शांति कुमार सेठी, लेखाकार रविदत्त सनाढ्य, कनिष्ठ लेखाकार संजय कुमार बाटिया, सहायक लेखाधिकारी कोमल कुमार अग्रवाल, वरिष्ठ लिपिक पन्नालाल व मानदेय पर नियुक्त अभियंता प्रकाश चंद सारस्वत से मिलीभगत कर यह भुगतान प्राप्त किया है। इस तरह से निगम के अधिकारी व कर्मचाररियों ने अपने पद का दुरुपयोग् किया। जबकि उमेश कुमार ने फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर निगम से 3.37 लाख 230 रुपए का भुगतान प्राप्त कर सरकारी राशि का गबन किया है। इस मामले में एसीबी ने सभी को जांच में दोषी मानते हुए उनके खिलाफ धारा 420, 465, 466, 467, 468, 471 व 120 बी और पीसी एक्ट की धारा 13(1)(सी) (डी) व 13(2) में चालान पेश किया।

Published on:
02 Jul 2018 09:08 pm
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।

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