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Air India Plane Crash: आज भी रात को नींद नहीं आती, अहमदाबाद प्लेन हादसे में बाल-बाल बचे कोटा के मयंक ने सुनाई आपबीती

Kota MBBS Student Mayank Sen: अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे को एक साल बीत चुका है लेकिन उस भयावह दिन की यादें आज भी कई लोगों के दिलों में ताजा हैं। कोटा के मेडिकल छात्र मयंक सेन उन चंद लोगों में हैं, जो महज कुछ मिनटों के अंतर से मौत को मात देकर बच निकले थे।
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कोटा

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Akshita Deora

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नमोनारायण पारीक

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Updated: 12 Jun 2026, 10:37 AM IST

Air Plan Crash

अहमदाबाद विमान हादसे में बाल-बाल बचे कोटा सुल्तापुर में दीगोद निवासी मेडिकल छात्र मयंक सेन का फोटो: पत्रिका

Ahmedabad Plane Crash Emotional Story: समय कभी-कभी ऐसे जख्म दे जाता है, जिन्हें वर्षों बाद भी भुला पाना आसान नहीं होता। अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे में 260 लोगों की मृत्यु को एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस दर्दनाक हादसे की यादें आज भी कई परिवारों के दिलों में ताजा हैं। इन्हीं यादों के साथ आज भी जी रहे हैं कोटा जिले के दीगोद निवासी मेडिकल छात्र मयंक सेन, जिन्होंने उस हादसे में अपने चार दोस्तों को खो दिया था। 12 जून 2025 को एयर इंडिया फ्लाइट AI-171 उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद हादसे का शिकार हो गई थी। विमान अहमदाबाद के जिस मेडिकल कॉलेज परिसर में गिरा, उसी बीजे मेडिकल कॉलेज में मयंक सेन भी अपने दोस्तों के साथ पढ़ाई कर रहे थे। हादसे से कुछ मिनट पहले ही मयंक कॉलेज परिसर से बाहर निकले थे और यही कुछ मिनट उनकी जिंदगी बचाने वाले साबित हुए।

कुछ देर पहले साथ हंसे थे, फिर हमेशा के लिए बिछड़ गए दोस्त

राजस्थान पत्रिका से बातचीत में मयंक सेन ने बताया कि उस दिन को वह जिंदगीभर नहीं भूल सकते। हादसे से करीब 10 मिनट पहले वे अपने दोस्तों जयप्रकाश चौधरी, मानव भादु, आर्यन राजपूत और राकेश डीहोरा के साथ बातचीत कर रहे थे। सभी हंसी-खुशी साथ थे और कुछ कार्य से मयंक बाहर निकल गए।

कुछ ही देर बाद एयर इंडिया का विमान कॉलेज परिसर में आ गिरा। हादसे में उनके चारों दोस्तों की मौत हो गई। मयंक बताते हैं कि हादसे के बाद का मंजर बेहद भयावह था। जब मलबे से शव निकाले जा रहे थे, वह पल आज भी आंखों के सामने आ जाता है। एक साल बीत जाने के बाद भी दोस्तों की याद आते ही आंखें नम हो जाती हैं। इस वर्ष कॉलेज में आज दोस्तों की याद में रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया जा रहा है।

वीडियो कॉल पर बेटे को देखा तब मिली राहत

मयंक के पिता किशन सेन और माता चन्द्रकला बाई ने बताया कि हादसे की खबर टीवी पर देखते ही पूरा परिवार घबरा गया था। जिस कॉलेज में विमान गिरा था, वहीं उनका बेटा पढ़ रहा था। उन्होंने बताया कि जब मयंक से फोन पर बात हुई और वीडियो कॉल पर उसे सुरक्षित देखा, तब जाकर परिवार की जान में जान आई। परिजनों ने कहा कि ईश्वर की कृपा और कुछ मिनटों के अंतर ने बेटे की जिंदगी बचा ली। आज भी उस हादसे का डर मन में बैठा हुआ है। बेटे की कुशलक्षेम जानने के लिए दिन में कई बार बात करते हैं। वर्तमान में मयंक उसी बीजे मेडिकल कॉलेज में अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन हादसे की यादें आज भी उनके मन में ताजा हैं।