कोटा

पत्रिका में प्रसूताओं की किडनी ट्रांसप्लांट मामले को उठाने के बाद हरकत में आया प्रशासन, आश्वासन के बाद डायलिसिस फिर शुरू

किडनी फेलियर से जूझ रही 5 प्रसूताओं के डायलिसिस रोकने के मामले में खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बाद महिलाओं ने दोबारा डायलिसिस शुरू करा दिया।
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Jul 17, 2026
Kota Medical Hospital
सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में वार्ता के लिए पहुंची महिलाएं और उनके परिजनों का फोटो: पत्रिका

Kota Medical College Dialysis Dispute Resolved: किडनी फेलियर से जूझ रही 5 प्रसूताओं का मामला प्रमुखता से सामने आने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। गुरुवार को कोटा जिला कलक्टर के निर्देश पर एडीएम (सिटी) विनोद मल्होत्रा और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों से चर्चा की। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद डायलिसिस कराने से इनकार कर रही महिलाओं ने उपचार फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। एडीएम मल्होत्रा ने बताया कि मरीजों को नियमानुसार इलाज जारी रखने और करीब 90 दिन बाद उनकी चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा दिया गया है। साथ ही सहायता राशि के लिए कमेटी गठित करने का आश्वासन भी दिया गया।

डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि किडनी ट्रांसप्लांट का निर्णय चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप ही लिया जाएगा। यदि निर्धारित अवधि के बाद भी किडनी की कार्यक्षमता सामान्य नहीं होती है, तभी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। तब तक नियमित डायलिसिस आवश्यक है। मरीजों की निगरानी के लिए चिकित्सकों की टीम लगातार सक्रिय रहेगी।

प्रशासन ने मरीजों और उनके परिजनों को भरोसा दिलाया कि उपचार के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। अस्पताल प्रबंधन को भी निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों की नियमित जांच, दवाइयों और डायलिसिस की व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही नहीं हो। परिजनों ने प्रशासन के आश्वासन के बाद राहत महसूस की और उम्मीद जताई कि जल्द ही उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकलेगा। अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की निगरानी लगातार की जाएगी और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से भी राय ली जाएगी।

ये है मामला

गौरतलब है कि चार से आठ मई के बीच सिजेरियन प्रसव के बाद इन महिलाओं की किडनियां प्रभावित हो गई थीं। पिछले दो माह से वे नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती हैं। राजस्थान पत्रिका में उनकी पीड़ा प्रकाशित होने और डायलिसिस का बहिष्कार करने के बाद प्रशासन ने पीड़िताओं व उनके परिजनों से बात की। महिलाओं और उनके परिवारों ने इलाज, आर्थिक सहायता और भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं प्रशासन के सामने रखीं। अधिकारियों ने सभी समस्याओं का समाधान करने और उपचार प्रक्रिया को सुचारू रखने का आश्वासन दिया।

Updated on:
17 Jul 2026 11:04 am
Published on:
17 Jul 2026 10:51 am