
कोटा. आगामी चार साल में देश में कोई भी ब्रॉडगेज रेलमार्ग विद्युतीकृत होने से वंचित नहीं रहेगा। ऐसे में विद्युत लोको ही ट्रेनों को दौड़ाएंगे, डीजल इंजन की जरूरत नहीं रहेगी। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने भारतीय रेल के विद्युतीकरण से वंचित शेष ब्रॉडगेज मार्गों के विद्युतीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति देने के बाद कोटा मंडल के बचे 18 प्रतिशत गैर विद्युतीकृत मार्ग के विद्युतीकृत होने की राह प्रशस्त हो गई है।
कोटा मंडल में 896 रूट किलोमीटर रेलमार्ग है। इसमें 738 रूट किलोमीटर विद्युतीकृत है। गुडला-चंदेरिया रेलमार्ग अभी बिना विद्युतीकृत है। पश्चिम मध्य रेलवे में 3003 रूट किलोमीटर ट्रेक है, इसमें 1868 किमी यानी 63 प्रति रूट किमी ट्रेन विद्युतीकृत है। इसमें कोटा मंडल में सबसे ज्यादा रेलमार्ग विद्युतीकृत है।
प्रस्तावित मार्गों का विद्युतीकरण पूरा होने पर भारतीय रेल का ब्रॉडगेज नेटवर्क 100 प्रतिशत बिजली ट्रेक्शन से संचालित होगा। इससे परिचालन कुशलता बढ़ेगी, लाइन क्षमता में बढ़ोतरी होगी और रेलगाडिय़ों की औसत गति बढ़ेगी। विद्युतीकरण के बाद भारतीय रेल के ईंधन बिल में प्रति वर्ष 13,510 करोड़ रुपए की बचत करेगा। निर्माण अवधि के दौरान लगभग 20.04 मानव दिवसों का प्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा। विद्युतीकरण के लिए प्रस्तावित 108 सेक्शन के तहत 13,675 मार्ग किलोमीटर का कवरेज है।
डीजल की खपत कम होगी
विद्युतीकरण का कार्य 12,134,50 करोड़ रुपए की लागत से 2021-22 तक पूरा किया जाना है। इसके बाद प्रति वर्ष 2.83 बिलियन लीटर हाई स्पीड डीजल की खपत में कमी आएगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
ईंधन का बिल घटेगा
अभी भारतीय रेल के लगभग दो तिहाई माल ढुलाई तथा यात्री परिवहन के आधे से अधिक का संचालन बिजली कर्षण से हो रहा है। बिजली कर्षण का भारतीय रेल के कुल ऊर्जा व्यय में केवल 37 प्रतिशत का योगदान है। इस लाभ के कारण विद्युतीकरण के बाद भारतीय रेल अपने ईंधन बिल में प्रति वर्ष 13,510 करोड़ रुपए की बचत करेगा।
ट्रेक्शन में परिवर्तन की जरूरत नहीं रहेगी
शत प्रतिशत विद्युतीकरण से बाधारहित ट्रेन संचालन होगा और कर्षण परिवर्तन यानी डीजल से इलेक्ट्रिक और इलेक्ट्रिक से डीजल ट्रेक्शन में परिवर्तन के कारण ट्रेनों को रोककर रखने की प्रवृत्ति समाप्त होगी। बिजली इंजनों की उच्च गति तथा उच्च वहन क्षमता के कारण रेलवे को लाइन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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शहर के बीच पसरे हैं 'मौत के गड्ढ़ेÓ
यूआईटी की खाली जमीन पर अवैध खनन होने से बन गए बड़े-बड़े तालाब, क्रेशर बस्ती और बरड़ा बस्ती के आस-पास हालत सबसे ज्यादा खराब
कोटा. शहर के बाहर तो छोडि़ए, भीतर तक मौत को न्योता देते सैकड़ों गड्ढे दिखाई पड़ जाएंगे। सबसे ज्यादा खराब हालात क्रेशर बस्ती और बरड़ा बस्ती के आस-पास के इलाकों की है। जहां अवैध खनन होने के बाद 10 से 20 फीट गहरे गड्ढे हो चुके हैं। इनमें पानी भरने के कारण अब वो कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। गुरुवार शाम क्रेशर बस्ती के पास अवैध खदान में डूबने से तीन किशोर डूब गए थे। अवैध खनन पर सरकारी अमला लगाम नहीं लगा सका। पत्थर के लालच में खननकर्ताओं ने शहर के बाहर ही नहीं अंदर की बस्तियों तक में जमकर खनन किया। जब गड्ढे ज्यादा गहरे हो गए और बड़ी मशीनों के बिना खनन करना मुश्किल हुआ तो उस इलाके को उसी हाल में छोड़कर चलते बने। सरकारी अमले ने भी इन गड्ढों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया, लेकिन जब बरसात हुई तो इन गड्ढों में पानी भर गया। आस-पास की समतल जमीन को देख इन गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में बच्चे खेलते हुए इनमें उतर जाते हैं, और क्रेशर बस्ती जैसा दर्दनाक हादसा सामने आ जाता है। पत्रिका टीम ने शुक्रवार को पूरे शहर में खुदे ऐसे ही जानलेवा गड्ढों की पड़ताल की। पेश है एक रिपोट...र्।
क्रेशर बस्ती
अनन्तपुरा थाना क्षेत्र में कोटा उदयपुर मेगा हाइवे के निकट क्रेशर बस्ती के आस-पास अवैध खनन के चलते करीब एक दर्जन से ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे दिखाई पड़ जाते हैं। इनमें से अधिकांश में बारह महीने पानी भरा रहता है। आस-पास कच्ची बस्ती होने से छोटे बच्चे इनमें नहाने पहुंच जाते हैं। उन्हें गड्ढों की गहराई का पता नहीं चल पाता और जिन बच्चों को तैरना नहीं आता, वह दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
बरड़ा बस्ती
अनन्तपुरा थाना क्षेत्र में ही बरड़ा कच्ची बस्ती के पीछे वन भूमि पर अवैध खनन के चलते बारिश में बड़े बड़े गड्ढे पानी से लबालब हो रहे हैं। इनकी गहराई का पता भी नहीं चल पाता। इन गड्ढों में बस्ती की महिलाएं व पुरुष नहाने से लेकर कपड़े धोने का काम करते हैं। य
हां हर समय हादसों का अंदेशा बना रहता है।
विवेकानन्द नगर
स्वामी विवेकानन्द नगर और कोटा विश्वविद्यालय के बीच न्यास की खाली पड़ी भूमि पर बडे-बड़े गड्ढे पानी से लबालब भरे हुए हैं। इनके आस-पास झोपड़ पट्टी पैर पसारने लगी है। इनमें रह रहे लोग नहाने से लेकर कपड़े धोने तक के लिए इन्हीं गड्ढों में भरे पानी का इस्तेमाल करते हैं। इन गड्ढों के पास यूआईटी की कालोनियां भी बसी हुई हैं।
टैगोर नगर
रावतभाटा रोड पर टैगोर नगर में विधि महाविद्यालय के पीछे बड़े भूभाग पर बारिश का पानी भरा हुआ है। इसमें भी बच्चे ही नहीं बड़े लोग नहाते हैं। खाद्य निगम के जिला कार्यालय के सामने भी बड़े चौड़े गड्ढे में पानी भरा हुआ है। इन गड्ढों में कभी भी कोई हादसा हो सकता है।