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Kota News: दिल की सर्जरी के इंतजार में 13 साल तक AIIMS के चक्कर लगाते रहे परिजन, अब 15 साल की तन्वी की मौत

Kota News: तन्वी दो साल की उम्र से जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी और करीब 13 साल से उसके परिजन सर्जरी की उम्मीद में दिल्ली एम्स के चक्कर लगा रहे थे।
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कोटा

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Anil Prajapat

Sep 03, 2026

Tanvi Pariani-1

तन्वी परियानी। फोटो: पत्रिका

कोटा। कोटा की 15 वर्षीय तन्वी परियानी की मंगलवार सुबह दिल्ली स्थित एम्स में इलाज के दौरान मौत हो गई। तन्वी दो साल की उम्र से जटिल जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थी और करीब 13 साल से उसके परिजन सर्जरी की उम्मीद में दिल्ली एम्स के चक्कर लगा रहे थे। परिजनों का आरोप है कि कई बार सर्जरी की तारीख तय होने के बावजूद ऑपरेशन नहीं किया गया। तन्वी को 24 अगस्त को उपचार के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह करीब 3.30 बजे उसने दम तोड़ दिया।

गुमानपुरा संगम होटल की गली निवासी तन्वी के पिता मुकेश परियानी कपड़े की दुकान पर काम करते हैं। बेटी के इलाज के लिए उन्होंने वर्षों तक कोटा से दिल्ली के चक्कर लगाए। पिता का आरोप है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्होंने चिकित्सकों के कहने पर उपचार और सर्जरी से संबंधित राशि जमा कराई, लेकिन बेटी की सर्जरी नहीं हो सकी। परिजनों के मुताबिक, तन्वी के इलाज के लिए वर्ष 2014 में करीब डेढ़ लाख रुपए जमा कराए गए थे।

2015 में दी थी पहली तारीख, फिर बढ़ती गईं तारीखें

मुकेश के अनुसार, तन्वी की सर्जरी के लिए पहली तारीख 2 सितंबर 2015 दी गई थी। इसके बाद ऑपरेशन की तारीख दिवाली के बाद तय की गई। 16 दिसंबर 2015 को तन्वी को भर्ती भी कराया गया, लेकिन चिकित्सकों ने दांत में समस्या बताकर सर्जरी टाल दी। परिजनों ने दांत का उपचार भी करा दिया, लेकिन इसके बाद भी ऑपरेशन नहीं हुआ। फिर वर्ष 2016 की तारीख दी गई। इसी तरह तारीखें आगे बढ़ती रहीं। मुकेश का आरोप है कि वर्ष 2018 में अस्पताल की ओर से सर्जरी को अनुपयुक्त बताया गया था। इसके बावजूद परिजन उपचार की उम्मीद में एम्स जाते रहे। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण के कारण करीब तीन साल तक दिल्ली नहीं जा सके। वर्ष 2023 से उन्होंने दोबारा एम्स में उपचार के लिए जाना शुरू किया, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी।

जन्मजात बीमारी में हार्ट की नस नहीं थी

परिजनों के अनुसार, तन्वी का जन्म 6 नवंबर 2010 को हुआ था। बचपन से ही उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी थी। जांच में जन्मजात हृदय रोग सामने आया। उसके हृदय की एक नस विकसित नहीं थी और चिकित्सकों ने उसमें कंड्यूट डालने की बात कही थी। परिजनों का दावा है कि कंड्यूट और इलाज से जुड़ी राशि भी एम्स में जमा करा दी गई थी। दिल्ली एम्स में उसका उपचार 10 अक्टूबर 2012 से चल रहा था। तन्वी पढ़ाई में काफी होशियार थी और कक्षा 9 में पढ़ रही थी। परिजनों ने तन्वी के इलाज में देरी का आरोप लगाते हुए पीएम पोर्टल पर शिकायत किए जाने की बात कही है।

24 अगस्त को लेकर गए थे दिल्ली

मुकेश परियानी और उनकी पत्नी भाविका 24 अगस्त को तन्वी को लेकर दिल्ली गए थे। इसके बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। पिता ने आरोप लगाया है कि एम्स के चिकित्सकों ने अभी भी उनकी बेटी को देखा तक नहीं। तन्वी का दिल्ली में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसके बाद शव को कोटा लाकर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

इनका कहना है

तन्वी को 24 अगस्त को भर्ती किया गया था। सोमवार को प्रत्यारोपण से पहले की जांच के तहत एंडोस्कोपी हुई। मंगलवार तड़के 2.50 बजे उसे कमजोरी महसूस हुई और शरीर नीला पड़ने लगा। उसका ऑक्सीजन स्तर 48 प्रतिशत तक गिर गया। ऑक्सीजन देने के बाद उसे हृदयाघात हुआ और सुबह 5.06 बजे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
-डॉ. वी. देवगौरू, हृदय शल्य चिकित्सा विभाग प्रमुख, एम्स