कोटा

Rajasthan: गेहूं की बंपर पैदावार के बावजूद भी MSP पर नहीं बेच पा रहे किसान, कृषि विभाग की रिपोर्ट में ये हुआ खुलासा

Wheat Bumper Arrival: कृषि विभाग की रिपोर्ट में सामने आया है कि खरीद प्रक्रिया की जटिलताओं और सीमित खरीद के कारण बड़ी संख्या में किसानों को गेहूं मंडियों में कम दाम पर बेचना पड़ रहा है।

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Mar 30, 2026
फोटो: पत्रिका

Agriculture Department Report: रबी फसल के लिए मौसम अनुकूल रहने और सिंचाई के लिए बांधों में पर्याप्त पानी होने से इस बार हाड़ौती में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है। सरकार ने गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद शुरू कर दी है, लेकिन जटिल प्रक्रिया और विसंगतियों के कारण किसान एमएसपी पर सरकार को गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं।

सरकार ने गेहूं खरीद पर राशनिंग कर दी है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गेहूं का उत्पादन आठ क्विंटल प्रति बीघा हुआ है, जबकि सरकार प्रति बीघा साढ़े छह क्विंटल ही खरीदेगी। इस कारण किसानों की दुविधा है कि आधा गेहूं सरकारी कांटे पर बेचेंगे तो आधा मंडियों में बेचना पड़ेगा।

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पत्रिका ने हाड़ौती में खरीद केन्द्रों की पड़़ताल की तो सामने आया कि 80 फीसदी गेहूं किसान मंडियों में औने-पौने में दामों में बेचने को विवश है, क्योंकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को जटिल कर दिया है। किसानों को बार-बार चक्कर लगाने को विवश होना पड़ रहा है। रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद खरीद की पोर्टल पर तिथि नहीं दी जा रही है। जबकि किसानों को रुपए की जरूरत अभी होती है। इस कारण वे मंडियों में गेहूं बेच रहे हैं। खरीद के नियमों में संशोधन को लेकर किसानों के साथ ही जनप्रतिनिधि भी आवाज उठा रहे हैं।

यह खामियां

  1. प्रति बीघा साढ़े छह क्विंटल की खरीद हो रही है, ऐसे में बाकी के गेहूं को मंडियों में बेचने के लिए अलग से ट्रैक्टर-ट्रॉली में लेकर आना पड़ेगा। इससे दो से तीन हजार रुपए किराया देना होता है।
  2. पोर्टल पर पंजीयन करवाने के बाद भी जमीन जिस किसान के नाम है, उसको बॉयो मैटि्रक सत्यापन के लिए मंडी में लाना होगा। बुजुर्ग किसानों को दिनभर मंडियों में रहना पड़ता है। नेटवर्क नहीं आने से थम्ब नहीं लगता है। इस कारण इंतजार करना पड़ता है।
  3. बंटाईदार और मंदिर माफी की जमीन का पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा है। हाड़ौती में बड़ी संख्या में किसान बंटाई पर खेती करते हैं।

फैक्ट फाइल

  • 1.40 लाख हैक्टेयर कोटा
  • 1.49 लाख हैक्टेयर बूंदी
  • 1.08 लाख हैक्टेयर बारां
  • 0.76 लाख हैक्टेयर झालावाड
  • 50 क्विंटल प्रति हैक्टेयर औसत उत्पादन
  • 2.35 लाख एमटी की खरीद कोटा जिले में अनुमान
  • 1.80 लाख एमटी पिछले साल खरीद हुई थी
  • 2,585 प्रति क्विंटल गेहूं का एमएसपी
  • 150 रुपए प्रति क्विंटल बोनस

खरीद केन्द्र

  • 7 एफसीआई
  • 50 राजफैड
  • 10 तिलम संघ
  • 1 एनसीसीएफ

पोर्टल पर बुकिंग कराने के बाद भी गेहूं खरीद की तिथि नहीं दी जा रही है। नियमों की जटिलता के कारण किसान रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पर रहे हैं। मशीन में अंगूठा भी नहीं पाता पता है। ऐसे में नियम सरल किए जाए।
रामस्वरूप पहाड़, माधोराजपुरा

किसानों का पूरा गेहूं खरीदा जाना चाहिए। आधे सरकार कांटे पर बेचेगा और आधा मंडी में ऐसे में किसानों को नुकसान होगा। जटिल प्रक्रिया के कारण ही किसान मंडियों में सस्ते में गेहूं बेचने को मजबूर है।
सुखलाल मीणा, बालिता

कोटा संभाग में गेहूं का उत्पादन करीब 25 लाख मीटि्रक टन का अनुमान है, जबकि सरकार केवल छह लाख टन ही खरीदेगी। इस कारण 19 लाख टन गेहूं किसानों को मंडियों में सस्ते में बेचना पड़ेगा। सरकार इस पर विचार करें।
दशरथ कुमार महामंत्री हाड़ौती किसान यूनियन

हाड़ौती सिंचित क्षेत्र है। इसलिए यहां गेहूं का औसत उत्पादन प्रति बीघा आठ क्विंटल होता है। इसलिए एमएसपी पर खरीद भी साढ़े छह क्विंटल बीघा की जगह आठ क्विंटल बीघा होनी चाहिए।
मुकुट नागर, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा

एमएसपी पर गेहूं खरीद के लिए किसान पंजीकरण के लिए सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल कर दिया है। ताकि किसानों को कोई परेशानी नहीं हो।
कुशाल बिलाला डीएसओ, द्वितीय कोटा

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Updated on:
30 Mar 2026 12:31 pm
Published on:
30 Mar 2026 12:30 pm
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