
कोटा. महिला एवं बाल विकास विभाग का भगवान ही मालिक है। विभाग में मॉनिटरिंग में महत्वपूर्व भूमिका अदा करने वाली महिला पर्यवेक्षकों के पद खाली हैं। स्थिति सिर्फ कोटा जिले की ही नहीं, पूरे प्रदेश की है। जिले में 9 स्थानों पर महिला पर्यवेक्षक नहीं हैं और प्रदेश में 1 हजार 700 महिला पर्यवेक्षकों के पद रिक्त हैं। इसके चलते आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण खानापूर्ति होकर रह गया है।
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जिले में शहरी और गामीण मिलाकर छह ब्लॉक हैं। इन ब्लॉक में 1282 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। चेचट ब्लॉक में छोटे-बड़े 233 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 9 महिला पर्यवेक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन इनमें महज तीन तैनात हैं। इटावा में 182 केन्द्रों के लिए 6 सुपरवाइजर चाहिए, लेकिन 5 ही हैं। कोटा सिटी व लाडपुरा ब्लॉक में 1-1 पद रिक्त है। एक मात्र सुल्तानपुर ब्लॉक के सभी सेक्टर में महिला पर्यवेक्षक तैनात हैं। बारां जिले में 51 पदों में से 27 पद रिक्त हैं, वहीं बूंदी में 6 महिला पर्यवेक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं। झालावाड़ में 19 पदों पर महिला पर्यवेक्षक नहीं है।
एक पर्यवेक्षक के जिम्मे 45 केन्द्र
पद रिक्त होने के चलते हालत यह है कि ज्यादातर महिला पर्यवेक्षक के जिम्मे 45-45 केन्द्र हैं। एक पर्यवेक्षक को हर दिन एक केन्द्र का निरीक्षण करना होता है। जिन महिला पर्यवेक्षकों के हिस्से में 30 से अधिक केन्द्र हैं, उन क्षेत्रों में निरीक्षण करना भी मुश्किल हो जाता है।
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जिम्मेदारी अहम
महिला पर्यवेक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वे आंगनबाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण करती हैं। आंगनबाड़ी कर्मचारियों के कार्य, बच्चों की स्थिति, केन्द्रों के रजिस्टर, पोषाहार आदि को चैक करती हैं। रिपोर्ट अधिकारियों को देती हैं।
महिला सुपरवाइजरों की भर्ती होना जरूरी है। पर्यवेक्षकों को अतिरिक्त कार्य सौंप रखा है। समय पर आंगनबाड़ी केन्द्र चैक नहीं हो पाते हैं।
-शाहिदा खान, प्रदेशाध्यक्ष, राजस्थान आंगनबाड़ी महिला कर्मचारी संघ
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कोटा में कुछ पद रिक्त हैं। दूसरे जिले से हाल ही दो महिला पर्यवेक्षकों को कोटा लगाया है। हर माह विभाग से रिपोर्ट सरकार को भेजी जाती है। रिक्त पद भरने के लिए पिछले दिनों आवेदन भी लिए गए थे।
-कृष्णा शुक्ला, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग