
102 डिग्री बुखार भी नहीं रोक सका अरुंधति का हौसला
कॉमनवेल्थ गेम्स में इंग्लैंड की बॉक्सर को 5-0 से हराकर जीता स्वर्ण,
प्रदेश की पहली महिला मुक्केबाज बनीं
तालेड़ा. जज्बा, जुनून और जीत का अद्भुत उदाहरण पेश करते हुए कोटा की मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। जिले के तालेड़ा उपखंड क्षेत्र के गांव गोविंदपुर बावड़ी की बेटी तथा ननिहाल तालेड़ा क्षेत्र के बड़ुंदा गांव की अरुंधति ने कोटा में अपना अभ्यास शुरू किया था। अरुंधति की प्रारिम्भक शिक्षा गोविन्दपुर बावड़ी में ही हुई है। अरुंधति ने गांव का ही नहीं अपने जिले सहित प्रदेश का नाम विश्व में रोशन किया है।
70 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड की केटल रेड को 5-0 से हराकर प्रदेश को पहली बार महिला बॉक्सिंग में कॉमनवेल्थ का स्वर्ण पदक दिलाया।
ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में अरुंधति का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में मार्गन एंडरसन को 3-1 तथा सेमीफाइनल में गत चैंपियन रोजी एक्लेस को 4-0 से हराया। फाइनल में भी उन्होंने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाते हुए एकतरफा जीत दर्ज की।
खास बात यह रही कि फाइनल मुकाबले से पहले अरुंधति 102 डिग्री बुखार से जूझ रही थीं। दवा लेने के बाद वह रिंग में उतरीं और अदम्य साहस का परिचय देते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
बचपन में बास्केटबॉल खिलाड़ी रही अरुंधति ने पिता सुरेश चौधरी की प्रेरणा से बॉक्सिंग को अपनाया। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ उनका सफर आज अंतरराष्ट्रीय मुकाम तक पहुंच चुका है। एशियन और यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी अरुंधति का यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छठा स्वर्ण पदक है।
अरुंधति की इस उपलब्धि पर कोटा सहित पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है। परिवार, खेल प्रेमियों और विभिन्न संगठनों ने उन्हें बधाई देते हुए इसे प्रदेश के खेल इतिहास की बड़ी उपलब्धि बताया। अब उनकी नजर ओलंपिक में स्वर्ण पदक पर है।