
कोटा . संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत भर्ती रोगियों पर रात 'भारी' पड़ रही है, वहीं इन रोगियों के तीमारदारों पर दिन...। इसका कारण है यहां योजना के तहत खुला नि:शुल्क दवा काउंटर....।
यदि रात में किसी भर्ती भामाशाह लाभार्थी को दवा की जरूरत पड़ती है तो उसे या तो सुबह तक इंतजार करना पड़ता है या गंभीर स्थिति में जेब ढीली कर बाहर से दवा लानी पड़ती है। ऐसे कई तीमारदार हैं, जो उनके भर्ती मरीजों के लिए रात में बाहर से दवा ला रहे हैं, यदि वह दवा नहीं लाएं तो मरीजों की जान पर बन सकती है।
योजना के तहत अस्पताल में रात को वही दवाएं मिलेंगी, जो मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना में शामिल हैं, जबकि भामाशाह रोगियों को आवश्कता पडऩे पर बाहर से खरीदकर दवाएं भी दी जाती हैं।
High Court के आदेशों को नहीं मान रहे खुद सरकारी अधिकारी
लम्बी कतारों में होना पड़ता है परेशान
सुबह दवा काउंटर खुलने के बाद 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक रोगी के परिजन दवा लेने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। तीमारदारों को घंटों परेशान होना पड़ता है।
वहीं बाहर की दवा लेने के लिए मिलने वाली एनओसी के लिए भी तीमारदारों को परेशान होना पड़ता है। एक ही दवा काउंटर होने से समस्या ज्यादा है। इसके साथ ही सुबह चिकित्सक का वार्डों में राउंड होता है और उसी समय दवाएं लिखी जाती हैं। उसके बाद तीमारदार एक साथ एक ही काउंटर पर दवा लेने पहुंचते हैं। रोजाना करीब 150 से 170 रोगी भामाशाह दवा काउंटर पर दवा लेने पहुंच रहे हैं।
24 घंटे नहीं खुलता भामाशाह काउंटर
एमबीएस में भामाशाह काउंटर सुबह 8 से लेकर रात 8 बजे तक ही खुलता है। 24 घंटे काउंटर नहीं खुलने से रोगी को गंभीर अवस्था में भी सुबह 8 बजे तक दवा लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है। दूसरी ओर नए अस्पताल में भामाशाह दवा काउंटर 24 घंटे खुलता है।
जल्द करेंगे व्यवस्था
यहां जन औषधि केन्द्र बनना बाकी है, इसमें कुछ समय और लगेगा, उसके बाद यहां भी 24 घंटे दवाएं मिलने लगेंगी। जल्द सुधार करेंगे।
-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल