कोटा

Election 2019 : मोदी-शाह अड़े और आ गई वसुंधरा राजे के चुनाव लडऩे को लेकर बड़ी खबर..

भाजपा केंद्रीय नेतृत्व सख्त, कहा- वसुंधरा, शिवराज और रमन लड़ें चुनाव या संन्यास ले लें
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Mar 15, 2019
kota news
Election 2019 : मोदी-शाह अड़े और आ गई वसुंधरा राजे के चुनाव लडऩे को लेकर बड़ी खबर..

आम चुनाव के लिए रणभेरी बज चुकी है और राजनीतिक दलों के बीच सियासी जंग भी शुरू हो गई है। इतना ही नहीं अपना या अपने किसी रिश्तेदार का टिकट पक्का करने के लिए राजनेताओं में भी संघर्ष जारी है। इसी कड़ी में यह संग्राम राजस्थान में भी देखने को मिल रहा है।

बताया जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में रमनसिंह लोकसभा का चुनाव लेड़े लेकिन ये तीनों ही नेता चुनाव नहीं लडऩा चाह रहे। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के इस सख्त रवैये से चिंतित तीनों नेताओं ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के सामने गुहार लगाई है। अब देखना होगा कि क्या भाजपा केंद्रीय नेतृत्व अपने फैसले पर पुनर्विचार करती है या फिर कायम रहती है।

झालावाड़-बारां से चुनाव लड़ सकती हैं राजे..
अगर आलाकमान के दबाव में वसुंधरा राजे को चुनाव लडऩा पड़ता है तो यह संभव है कि वे अपनी परम्परागत सीट झालावाड़-बारां से चुनाव लड़ सकती है। इस सीट से मौजूदा सांसद वसुंधरा राजे के सुपुत्र दुष्यंत सिंह है। जबकि राजे 1989 से 2003 तक इस सीट से सांसद रही है और 2003 से लेकर अब तक जिले की झालरापाटन सीट से विधायक भी रहीं है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि
आजादी के बाद यह सीट सिर्फ झालावाड़ थी, लेकिन 2008 के परिसीमन में झालावाड़ जिले की 4 और बारां जिले की 4 विधानसभा सीटों को मिलाकर झालावाड़ा-बारां संसदीय क्षेत्र का गठन किया गया। यहां अब तक हुए कुल 16 लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा बीजेपी ने 8 बार जीत दर्ज की। 1989 से लगातार इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है, वहीं कांग्रेस ने 4 बार, भारतीय जनसंघ ने 2 बार, भारतीय लोकदल ने 1 बार और जनता पार्टी ने 1 बार इस सीट पर कब्जा जमाया।

आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में झालावाड़ से कांग्रेस के नेमीचंद कासलीवाल जीते थें, इसके बाद 1957 में कांग्रेस के ओंकारलाल यहां से सांसद बनें। 1962 के चुनाव में कांग्रेस के कोटा राजघराने के पूर्व महाराव बृजराज सिंह सांसद चुने गए। वहीं 1967 और 1971 का चुनाव भी बृजराज सिंह ही जीते लेकिन भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार के तौर पर। 1977 की जनता लहर में जब भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय हो गया तब बृजराज सिंह एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हुए लेकिन वे 1977 और 1980 का चुनाव पहले बीएलडी और बाद में जनता पार्टी के उम्मीदवार चतुर्भुज नागर से हार गए लेकिन 1984 में कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की और जूझार सिंह यहां से सांसद बनें। इसके बाद 1989 से 1999 तक लगातार 5 बार वसुंधरा राजे यहां से सांसद बनीं तो वहीं राज्य की राजनीति में राजे की एंट्री के बाद 2004 से 2014 तब लगातार 3 बार से वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह यहां से सांसद हैं।

Updated on:
15 Mar 2019 05:32 pm
Published on:
15 Mar 2019 05:21 pm