
कोटा बैराज का फोटो: पत्रिका
मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चंबल के बांधों से खरीफ सीजन में फसलों के लिए पानी देने को लेकर ठन गई है। राजस्थान सरकार ने 4 दिन पहले मध्यप्रदेश को चिठ्ठी लिखकर कोटा में किसान आंदोलन के मद्देनजर धान की फसल के लिए गांधी सागर बांध से 6000 क्यूसेक पानी 1 माह तक छोड़ने का आग्रह किया था और दो दिन में पानी छोड़ने की मांग रखी थी, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान के मांग पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया और राजस्थान को जवाब तक नहीं दिया है।
राजस्थान सीएडी के मुख्य अभियंता एवं अतिरिक्त सचिव संदीप माथुर ने 6 जुलाई को मध्यप्रदेश के मुख्य अभियंता नर्मदा तापी बेसिन, जल संसाधन विभाग उज्जैन को पत्र लिखकर खरीफ की फसलों के लिए कोटा बैराज से दाईं मुख्य नहर में 4500 क्यूसेक एवं बाईं मुख्य नहर में 1500 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग की थी। इसके लिए गांधी सागर बांध से 6000 क्यूसेक पानी एक माह के लिए छोड़ने का आग्रह किया। उधर कोटा और बूंदी के किसानों ने नहरों में पानी नहीं छोड़ने पर 13 जुलाई को कोटा में सीएडी कार्यालय पर महापड़ाव का ऐलान किया है। दोनों राज्यों के बीच उच्च स्तर पर पानी छोड़ने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
मध्यप्रदेश सरकार ने जून में राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर चंबल की दाईं मुख्य नहर से पानी छोड़ने की मांग की थी लेकिन राजस्थान ने उस वक्त दाईं मुख्य नहर में पानी नहीं छोड़ा। इस कारण राजस्थान के रवैये से मध्यप्रदेश नाराज है। मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग के कार्यपालक मंत्री चैतन्य चौहान ने कोटा सीएडी के अधीक्षण अभियंता को 10 जून 2026 को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश में चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत स्थापित लिफ्ट ऐरिगेशन पाइप लाइन नेटवर्क संचालन की टेस्टिंग के लिए 10 से 24 जून तक दाईं मुख्य नहर के पार्वती एक्वाडक्ट से 1200 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन उस वक्त राजस्थान ने पानी देने से मना कर दिया था। अब मध्यप्रदेश की बारी आई तो वह पानी देने को तैयार नहीं है।
मध्यप्रदेश सरकार को 6 जुलाई को ही गांधी सागर से धान के लिए पानी छोड़ने के लिए पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। लगातार सम्पर्क में हैं, कोई जवाब नहीं दे रहे। अब उच्च स्तर पर वार्ता चल रही है।
संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता, सीएडी कोटा
Updated on:
10 Jul 2026 07:57 am
Published on:
10 Jul 2026 07:53 am
