
कोटा . शहर की सड़कों में आवारा मवेशी का आतंक खत्म करने में नगर निगम पूरी तरह असफल नजर आ रही है। मवेशियों को रखने के लिए पर्याप्त जगह न होने की मजबूरी बता कर निगम ने अपनी जिम्मेदारी से तो पल्ला झांड लिया। लेकिन आमजन का क्या, जो आए दिन मवेशियों का शिकार होते रहते है। मंगलवार को एक मासूम बच्चे को सांड ने उठाकर फेंक दिया इस से बच्चा घायल हो गया गनीमत रही की बच्चे को ज्यादा चोटें नहीं आई वरना जान भी जा सकती थी
कब बनेगे स्मार्ट
कोचिंग कैपिटल कोटा का चयन भले ही स्मार्ट सिटी के तहत हो गया हो, लेकिन आज भी मुख्य सड़कों व इलाकों के हालात स्मार्ट नहीं हैं। फल-सब्जी के फुटकर विक्रेताओं ने स्मार्ट सिटी को सब्जीमंडी बनाकर रख दिया है। करीब-करीब सभी इलाकों में मुख्य सड़कों व चौराहों पर रोजाना सब्जीमंडी लगती है। यहां आवारा मवेशी घूमते रहते हैं। इस दौरान यातायात भी चालू रहता है। इससे हरदम हादसों का अंदेशा बना रहता है। पहले भी सड़क हादसे हो चुके हैं, लेकिन यूआईटी ने कभी इन सब्जीमंडियों को अन्यत्र शिफ्ट करने का कोई प्रयास नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने भी जताई थी नाराजगी
शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों का आतंक देख मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी अपनी नाराजगी जता चुकि हैं। पिछले वर्ष कोटा दौरे पर आई मुख्यमंत्री ने भी सड़क पर मवेशियों को लेकर नगर निगम आयुक्त व जिला कलक्टर को इनका समाधान करने के निर्देश दिए थे। बावजूद स्थिति नहीं संभली है। इधर इस मामले में अदालत में जनहित याचिका भी दायर की गई है।
पत्रिका व्यू: कब जागेगी शहर सरकार श हर की सड़कों पर बेलगाम घूमते मवेशियों के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं। हालत यह है कि लोग सड़क पर निकलने में डरने लगे हैं, लेकिन शहर के लोगों को सहूलियत की राह देने का जिम्मेदार तंत्र प्रभावी समाधान की जगह बैठकें करने में लगा है। हर हादसे के बाद व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं लेकिन दावे कभी हकीकत में नहीं बदलते। सड़कांे पर लोग सुकून से चल सकें इसके लिए जिम्मेदार शहर सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे। लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। वर्ना एेसे हादसों को रोक पाना मुमकिन नहीं।