
कोटा। चंबल जल बंटवारे तथा रबी फसल के लिए बांधों में जल उपलब्धता के संबंध में मध्य प्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की बुधवार को बैठक हुई। इसमें दोनों राज्यों के अधिकारियों ने एकराय से कहा कि इस बार बारिश कम होने से चंबल के बांधों में पानी की उपलब्धता कम है। ऐसे में सिंचाई के साथ गर्मी में पेयजल की जरूरत के हिसाब से प्रबंधन किया जाना आवश्यक है। दोनों राज्यों के बीच चंबल की दाईं मुख्य नहर में 18 अक्टूबर से पानी छोड़ने पर सहमति बनी। मध्य प्रदेश ने रबी के मुख्य सीजन में राजस्थान की ओर से जल समझौते के अनुरूप पानी नहीं देने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मांग के अनुरूप पानी नहीं दिया जाता। बैठक में तय किया कि दोनों राज्यों के अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी जल बंटवारें और जल प्रवाह पर आपस में समन्वय करेंगे, ताकि कोई विवाद नहीं हो।
तकनीकी समिति की बैठक राजस्थान के मुख्य अभियंता (पूर्व) एवं अतिरिक्त सचिव, सीएडी राजस्थान जयपुर की अध्यक्षता में वर्चुअली हुई। बैठक में रबी फसलों के लिए बांधों में जल उपलब्धता एवं जलस्तर के संधारण तथा इस वर्ष 2026-27 के लिए जल मांग एवं आपूर्ति से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया गया। मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने 18 अक्टूबर से 2000 क्यूसेक पानी की मांग रखी एवं राजस्थान के सीएडी अधिकारियों ने भी इसी तिथि से दाईं मुख्य नहर में जल प्रवाह करने की मांग रखी, जिस पर दोनों राज्यों के अधिकारियों ने सहमति दे दी। 18 अक्टूबर से जल प्रवाह शुरू होगा, जो धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा।
इस वर्ष कम वर्षा होने से बांधों में जल उपलब्धता पिछले वर्ष की भांति कम है। इस कारण रबी फसल के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसानों को कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों, जैसे चना आदि की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया। साथ ही, अधिक जल की खपत वाली फसलों के स्थान पर कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने के संबंध में चम्बल कमाण्ड क्षेत्र के काश्तकारों को प्रोत्साहन करने के लिए कहा गया।
राणा प्रताप सागर एवं जवाहर सागर बांध वृत्त कोटा के अधीक्षण अभियंता ने बैठक में बताया कि इस रबी सीजन के दौरान बांध के जलस्तर को कम से कम 1,150 फीट बनाए रखें। साथ ही, रबी सीजन के बाद राणा प्रताप सागर का जलस्तर 1,145 फीट बनाए रखें, जिससे आगामी गर्मियों में पीने के लिए पानी की परेशानी उत्पन्न न हो। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता ने भी नहर संचालन के दौरान राणा प्रताप सागर का स्तर 1150 फीट रखने के लिए कहा, जिससे मांग अनुसार नहरों का संचालन का नियंत्रण राणा प्रताप सागर से किया जा सके। इसके अनुसार मध्य प्रदेश से गांधी सागर में लगातार पानी छोड़ने की मांग की गई। मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध खंड के अधीक्षण अभियंता ने सकारात्मक आश्वासन दिया है।
मध्य प्रदेश ने पीक डिमांड अवधि के दौरान जल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस संबंध में जल की उपलब्धता एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों के मध्य समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई गई। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता ने कहा कि दोनों राज्यों की ओर से पानी की पीक डिमांड एक साथ होने पर रेगुलेशन में परेशानी आती है। वर्ष 2026-27 के दौरान मध्य प्रदेश को जल की आपूर्ति निर्धारित इंडेंट के अनुसार किए जाने की पूरी कोशिश की जाएगी। मध्य प्रदेश मुख्य सीजन में जल समझौते अनुरूप 3200 क्यूसेक पानी देने की मांग की है।
'दोनों राज्यों के मध्य जल बंटवारे, रबी फसलों के जल की उपलब्धता तथा बांध के जलस्तर के उचित संधारण के संबंध में अधिकारियों के आपसी समन्वय से कार्य करने पर सहमति बनी। बैठक सभी बिन्दुओं में सकारात्मक माहौल में चर्चा हुई है। बजट व मरम्मत के मुद्दों पर भी चर्चा हुई है।' -संजय कुमार सिंह सचिव, मध्यप्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियत्रंण मण्डल, कोटा
गांधी सागर बांध : 76.18
राणा प्रतार सागर बांध : 72.12
जवाहर सागर बांध : 71.63
कोटा बैराज : 98.08