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कोटा में झोलाछाप से इलाज पड़ा भारी: युवक का चेहरा फूला और हाथ-पैर की उंगलियां पड़ीं काली, 4 साल तक लगे थे स्टेरॉयड के इंजेक्शन

Cushing Syndrome Case Kota: कोटा में झोलाछाप से चार साल तक स्टेरॉयड के इंजेक्शन लेने के बाद युवक को कुशिंग सिंड्रोम, हाई ब्लड प्रेशर और उंगलियों में गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याएं हो गईं। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में तीन विभागों ने मिलकर उसका इलाज किया।
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कोटा

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Harshita Saini

•

Oct 12, 2026

Cushing Syndrome Case Kota

मरीज महेन्द्र व उसका गैंग्रीन पैर (Photo-Patrika)

कोटा. त्वचा की बीमारी से छुटकारा पाने के लिए एक युवक ने इलाज करवाया, लेकिन धीरे-धीरे उसकी परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती चली गई। शरीर में बदलाव आने लगे, वजन बढ़ने लगा और चेहरा भी फूल गया। शुरुआत में इन लक्षणों की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन बाद में हालत ऐसी हो गई कि हाथ-पैर की उंगलियां काली पड़ने लगीं और पैर में घाव हो गया। लंबे समय तक ठीक नहीं होने पर युवक की मुश्किलें और बढ़ गईं। बाद में युवक को कोटा के राजकीय मेडिकल कॉलेज से जुड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बीमारी की वजह और इलाज की दिशा तय की।

चार साल तक दिए गए स्टेरॉयड के इंजेक्शन

जानकारी के अनुसार, बारां जिले के छीपाबड़ौद निवासी महेन्द्र त्वचा रोग के लिए झोलाछाप से इलाज करवा रहा था। आरोप है कि उसे करीब चार साल तक हाई डोज स्टेरॉयड के इंजेक्शन दिए गए। लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने के बाद उसके शरीर पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे। उसका वजन बढ़ गया और चेहरा फूलने लगा। पेट पर बैंगनी रंग की धारियां भी पड़ गईं। इसके बाद हाथ-पैर की उंगलियां काली पड़ने लगीं और पैर में ऐसा घाव हो गया, जो लंबे समय तक भर नहीं रहा था।

जांच में सामने आया कुशिंग सिंड्रोम

मरीज की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने जांच की। जानकारी के मुताबिक, वह कुशिंग सिंड्रोम, हाई ब्लड प्रेशर और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं से भी जूझ रहा था। कुशिंग सिंड्रोम में शरीर में लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा कोर्टिसोल हार्मोन का असर रहने से वजन बढ़ना, चेहरा गोल होना और त्वचा पर धारियां पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है।

तीन विभागों ने मिलकर किया उपचार

महेन्द्र का उपचार राजकीय मेडिकल कॉलेज कोटा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में किया गया। एंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. नितेश कुमार बौद्ध की देखरेख में तीन विभागों के डॉक्टरों ने मिलकर उसका इलाज किया। मरीज की कई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उपचार किया गया। अस्पताल में इलाज के बाद अब उसकी हालत में सुधार है।