बदलाव के नाम पर कोटा दशहरा मेले का स्वरूप ऐसा बिगड़ा है कि दशकों से आ रहे दुकानदार तक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कोटा का दशहरा मेला 124 साल से लगातार शान-ओ-शौकत से भरता आ रहा है। देश-दुनिया में ख्याति भी है। यहां तीन पीढिय़ों से व्यापारी दुकानें लगाने आ रहे हैं, और हर साल इसलिए आते हैं कि वो मेले की व्यवस्थाओं से पूर्ण रूप से संतुष्ट थे, लेकिन इस बार व्यापारियों का अनुभव कुछ अच्छा नहीं रहा। बदलाव के नाम पर जो स्वरूप सामने आया है, उससे व्यापारी संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पुरानी व्यवस्थाएं ही बेहतर थी। पहले कभी दिक्कत नहीं आती थी, इस बार मेले में परेशानी ही परेशानी है। सुधारने के नाम पर मेले को बिगाड़ कर रख दिया है। सुविधाएं तक नहीं हैं। अब तक दुकानें भी नहीं लगा पाए हैं। ऐसे में ग्राहकी भी प्रभावित हो रही है।
इस साल झूलों के लिए कम जगह
मुम्बई निवासी झूला मालिक इमरान बताते हैं कि उनकी तीसरी पीढ़ी मेले में झूला लगा रही है। पहले दादा अली पटेल आते थे, फिर पिताजी याकूब अली और अब वे आते हैं। उन्होंने बताया कि इस साल मेले में जगह कम मिली है, वहीं सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। आशापाला माता मंदिर के पीछे झूलों के लिए जगह दी है। ग्राहकों के घूमने की जगह तक नहीं है।
Read More: 16 कलाओं से परिपूर्ण होगा शरद पूर्णिमा का चांद, सर्वार्थ सिद्धी योग से बरसेगा अमृत
पशु मेले पर पड़ी शिफ्टिंग की छाया
दौसा के बांदीकुई निवासी शिवप्रसाद मीरवाल ने बताया कि पिछली बार से धर्मपुरा रोड पर पशु मेला शिफ्ट हो गया, इससे बिक्री पर असर आया है। उनका परिवार ५० साल से यहां आ रहा है। पिताजी भूरेराम आते थे। उनके बाद १० साल से वो दुकान लगा रहे हैं। अब उनके बेटे दौलतराम व राजेंद्र भी सहयोग करते हैं। इस बार भी ज्यादा कुछ नहीं है।
दुकान मेले में, पानी भरो किशोरपुरा से
मथुरा के खिलौना व्यापारी महेशचंद ने बताया कि पिताजी दौलतराम यहां दुकान लगाते थे। उनके बाद 50 साल से वो खुद खिलौने की दुकान लगा रहे हैं। पहले दुकानदारों को पर्याप्त जगह के अलावा लाइट-पानी की पर्याप्त सुविधा मिलती थी। प्रत्येक बाजार में नल कनेक्शन दिए जाते थे, लेकिन अब पीने का पानी तक नहीं मिलता। किशोरपुरा से पानी लाना पड़ रहा है।