कोटा कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने तीन वर्ष पहले कॉलेजों में एडमिशन के लिए परसेन्टाइल सिस्टम लागू किया था। परसेन्टाइल सिस्टम लागू होने के बाद स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है। स्थिति यह है कि ओपन बोर्ड में 80 फीसदी अंक पर मेरिट में जबकि सीबीएसई के 94 फीसदी वालों को एडमिशन का इंतजार है।
कॉलेज शिक्षा निदेशालय ने तीन वर्ष पहले कॉलेजों में एडमिशन के लिए परसेन्टाइल सिस्टम लागू किया था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि विद्यार्थियों को एडमिशन में समानता व पारदर्शिता मिलेगी, लेकिन परसेन्टाइल सिस्टम लागू होने के बाद स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है।
जिन विद्यार्थियों ने 12वीं बोर्ड में अच्छे अंक हासिल किए, परसेन्टाइल सिस्टम ने उन्हें एडमिशन के लिए इंतजार की कतार में ला खड़ा किया। इस बार भी शहर के छह सरकारी कॉलेजों में कट ऑफ काफी ऊंची गई है। स्थिति यह है कि ओपन बोर्ड में 80 फीसदी अंक पर मेरिट है जबकि सीबीएसई के 94 फीसदी वाले विद्यार्थियों को एडमिशन का इंतजार है। एेसे में परसेन्टाइल सिस्टम खुद सवालों के घेरे में है। लगभग हर कॉलेज में स्टेट ओपन बोर्ड के स्टूडेंट्स की वजह से आरबीएसई और सीबीएसई के विद्यार्थी चिंतित हैं।
ओपन बोर्ड को ज्यादा महत्व
परसेन्टाइल सिस्टम में ओपन बोर्ड को आरबीएसई और सीबीएसई से भी ज्यादा महत्व दिया है। वर्ष 2013 तक कॉलेजों में 12वीं के अंकों के आधार पर एडमिशन होता था। सभी बोर्ड का मार्किंग पैटर्न अलग-अलग होने एवं सभी को उच्च शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए सरकार ने पर्सेंटाइल सिस्टम लागू किया।
निदेशालय का तर्क है कि सीबीएसई की अपेक्षा आरबीएसई का मार्र्किंग पैटर्न ज्यादा कठिन है। स्टेट ओपन बोर्ड के विद्यार्थी कम अंकों के कारण एडमिशन नहीं ले पाते। सभी बोर्ड के स्टूडेंट्स को एडमिशन में समान अधिकार मिले इसके लिए पर्सेंटाइल सिस्टम लागू किया गया। इसमें ओपन बोर्ड के 80 प्रतिशत और आरबीएसई के 94.60 प्रतिशत अंकों को बराबर माना गया है।
यानी ओपन के 80 फीसदी अंक प्राप्त करने वाले स्टूडेंट को एडमिशन मिल जाएगा जबकि सीबीएसई और आरबीएसई में उससे ज्यादा अंक प्राप्त करने वाला स्टूडेंट एडमिशन से वंचित रह जाता है।
सबसे ज्यादा नुकसान सीबीएसई बोर्ड को
परसेन्टाइल सिस्टम से कॉलेज एडमिशन में सबसे ज्यादा नुकसान सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियोंं को है, उसके बाद राजस्थान बोर्ड के विद्यार्थी घाटे में हैं। पिछले तीन वर्ष से परसेन्टाइल सिस्टम की वजह से एडमिशन में पेचीदगियां सामने आ रही हैं। एेसे में कई छात्र खुलकर इसका विरोध करने लगे हैं। वहीं कई लेक्चरर भी दबी जुबान से इस सिस्टम को सही नहीं मानते।
केस-1: राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में आरबीएसई में 71 परसेन्ट लाने वाले विद्यार्थी सूर्यवीर का एडमिशन नहीं हुआ, लेकिन नेशनल ओपन स्कूलिंग से 69 परसेन्ट लाने वाले विद्यार्थी का एडमिशन हो गया।