कांग्रेस के निशाने पर आए महापौर महेश विजय..
कोटा. पिछले हफ्ते केन्द्रीय शहरी मंत्रालय द्वारा स्वच्छता रैकिंग में कोटा के पिछडऩे के बाद शहर को क्लीन बनाने की महापौर और अधिकारियों के दावों की पोल खुल गई है। अब लोकसभा चुनावों के मद्देनजर रैंकिंग को लेकर सियासत अपने चरम पर है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रविंद्र त्यागी ने इस मामले में महापौर महेश विजय पर 302 का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर डाली है।
दरअसल पिछले साल के सर्वेक्षण में 101वीं रैंक वाला कोटा इस बार फिसड्डी साबित हुआ और 302 रैंक पर आकर टिका है। इसकी को लेकर त्यागी ने भाजपा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए है। त्यागी ने कहा कि महापौर ने पूरे देश में कोटा की साख की हत्या की है इस लिहाज से 302 रैंकिंग आने पर उनपर धारा 302 का मामला दर्ज होना चाहिए।
100 करोड़ का बजट, फिर भी फिसड्डी
देशभर के 4237 शहर इस दौड़ में शामिल थे। रैंक के आधार पर शहर की सफाई व्यवस्था से यहां के लोग खुश नहीं है। जबकि निगम सफाई के नाम पर सालाना 100 करोड़ का बजट खर्च कर रहा है।
केन्द्रीय शहरी मंत्रालय की टीम ने इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण को पूरी तरह गोपनीय रखा था। निगम के अधिकारियों तक को इसकी भनक नहीं लगने दी। केन्द्रीय टीम ने अलग-अलग चरणों में कोटा आकर सर्वेक्षण किया। 16 जनवरी को केन्द्रीय दल ने कोटा आकर शहर की सफाई व्यवस्था की जांच की थी। इस दौरान ही टीम ने शहर के मुख्य मार्गों की सफाई व्यवस्था पर ही नाखुशी जाहिर कर दी थी। टीम बाजारों में गई तो वहां भी बुरी स्थिति मिली। कचरा प्वाइंटों पर कचरा फैला हुआ था। ट्रेचिंग ग्राउण्ड पहुंची तो यहां कचरों का पहाड़ देखकर चकित रह गई। टीम में शामिल अधिकारी कचरा परिवहन की व्यवस्था से भी सन्तुष्ट नहीं थे।
कोटा की स्वच्छता रैकिंग
वर्ष रैकिंग
2017 341
2018 101
2019 302
सालभर चेताते रहे
पूरे वर्ष कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य शहर में हो रही सफाई व्यवस्था की दयनीय स्थिति को लेकर महापौर व अधिकारियों को चेताते रहे, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। कचरा परिवहन के टेंडर महापौर द्वारा कई बार इसलिए निरस्त कर दिए गए क्योंकि उन्हें अपने चहेते ठेकेदारों व पार्षदों को लाभ पहुंचाना था। इस कारण 302 रैंक पर आ टिके हैं।
अनिल सुवालका, प्रतिपक्ष नेता
पूरे वर्ष कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य शहर में हो रही सफाई व्यवस्था की दयनीय स्थिति को लेकर महापौर व अधिकारियों को चेताते रहे, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। कचरा परिवहन के टेंडर महापौर द्वारा कई बार इसलिए निरस्त कर दिए गए क्योंकि उन्हें अपने चहेते ठेकेदारों व पार्षदों को लाभ पहुंचाना था। इस कारण 302 रैंक पर आ टिके हैं।
अनिल सुवालका, प्रतिपक्ष नेता
यह सत्य है कि हम रैंकिंग में पिछड़ गए हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं लेकिन जल्द शहरवासियों को अच्छी व्यवस्था नजर आएगी।
महेश विजय, महापौर