
कोटा . शहरवासियों का लाख लाख शुक्र है, जो उन्होंने महज एक सप्ताह में मेरी बेटी दीपा के ऑपरेशन के लिए एक लाख 31 हजार 200 रुपए का सहयोग दिया। बेटी को अस्पताल में भर्ती करा दिया है। बुधवार को ऑपरेशन होना है। शहरवासियों ने तो बेटी दीपा पर भरपूर प्यार लुटाया। अब दीपा के जीवन की बागडोर डॉक्टर के हाथ में है। भगवान जो कुछ भी करेगा अच्छा ही करेगा। जन सहयोग से एकत्र राशि जब दीपा के पिता रेसपाल मीणा को सौंपी तो उनके मुख से यह उद्गार निकले।
पिता के पास नहीं थी ऑपरेशन की राशि
गौरतलब है कि भोजन नली में इन्फेक्शन से ग्रसित 11 वर्षीय बालिका दीपा के सिक्यूरिटी गार्ड पिता के पास ऑपरेशन की राशि नहीं थी। दीपा के ऑपरेशन के लिए डॉक्टर ने 1.90 लाख रुपए का खर्च बताया था। साथ ही करीब 40 हजार रुपए तक की छूट दिलाने का आश्वासन दिया था। रेसपाल के पास करीब 20-25 हजार रुपए खुद के रखे हुए है। ऐसे में बेटी के ऑपरेशन के लिए उन्हें करीब सवा लाख रुपए की आवश्यकता थी। यह राशि शहरवासियों ने सौंपी।
दे गए 30 हजार
पत्रिका के पास दिन में फोन आया कि दीपा के ऑपरेशन खचज़् की शेष राशि का इंतजाम हो गया। शाम को मैं आ रहा हूं। महाशय का नाम पूछते। उससे पहले ही फोन कट गया। शाम को श्रीपुरा निवासी प्रकाश हाडज़्वेयर के प्रोपराइटर वीरू माखीजा ने 30 हजार रुपए परिचित के साथ पत्रिका ऑफिस भेज दिए।
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इन्होंने किया सहयोग
महावीर नगर द्वितीय निवासी गिरीश पारेता ने 2500, इंद्रविहार निवासी स्वगीज़्य नरेंद्र गगज़्, सुशीला गगज़् की ओर से 500, केशवपुरा सेक्टर-7 निवासी दुर्गेश-नवीन मेहता ने 1000, संतोष मेहता ने 500, धर्मिष्ठा-शर्मिष्ठा ने 1000, गुमानपुरा निवासी अभिषेक शृंगी ने 2000 तथा एक भामाशाह ने 5000 रुपए का गोपनीय सहयोग किया।
आज भी खरा सोना है पत्रिका
भामाशाह के वीरू माखीजा ने कहा कि अखबार तो कई निकलते हैं, लेकिन पत्रिका आज भी खरा सोना है। जो भी छापता है ठोक बजाकर। पत्रिका की खबर की ऐसी खास है कि अनजान लोग भी सहयोग के लिए आगे आते है। दीपा के ऑपरेशन के मामले की खबर छापी है तो वह भी पूरी पड़ताल करके ही छापी होगी। मैं तो पूरा ऑपरेशन खचज़् उठाने के लिए तैयार था, लेकिन लेट हो गया। जो राशि कम पड़ रही थी। वह भेज दी। भगवान ने जब अपने को दिया है तो जरूरतमंद की सेवा करने में क्या जाएगा।