किसानों ने अधिक भूमि अवाप्ति का विरोध जताते हुए कहा कि सड़क किनारे की भूमि पर कोई व्यावसायिक प्वाइंट बनाया जाता है तो उसमें प्राथमिकता किसान को दी जाए।
कोटा.
केन्द्र सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत बनने जा रहे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर जिले में विरोध देखने को मिल रहा है। कोटा स्टोन उत्पादन का हार्ट माने जाने वाले रामगंजमंडी क्षेत्र के चेचट इलाके में लाइम स्टोन खदानों के चपेट में आने का मुद्दा तो गर्म है ही, अब सुल्तानपुर क्षेत्र में भी जमीन देने वाले किसान विरोध में उतरने लगे हैं। सोमवार को बड़ी संख्या में सीमलिया, कल्याणपुरा समेत अन्य गांवों के किसान दीगोद उपखंड कार्यालय पहुंचे और एसडीएम को आपत्ति-पत्र सौंपे। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अवाप्त की गई है, इसके अलावा केंद्र सरकार की ओर से किसानों की ढाई सौ से तीन सौ बीघा जमीन और मांगी जा रही है। जबकि, सरकार जो डीएलसी रेट दे रही वो ऊंट के मुंह में जीरा है। पूर्व सरपंच महेन्द्र शर्मा व राजेन्न्द्र ने बताया कि एक्सप्रेस-वे के लिए उनकी सम्पूर्ण भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। कई किसान भूमिहीन हो जाएंगे। किसानों ने अधिक भूमि अवाप्ति का विरोध जताते हुए कहा कि यदि सड़क किनारे की भूमि पर कोई व्यावसायिक प्वाइंट बनाया जाता है तो उसमें प्राथमिकता किसान को दी जाए। यहां पर सोमवार को कुल 17 किसानों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई।
यह की मांग
किसानों ने 5 सूत्रीय आपत्ति पत्र में कहा कि सड़क की निर्धारित चौड़ाई के अलावा अधिक भूमि अधिग्रहण की क ार्यवाही की जा रही है, लेकिन उद्देश्य किसानों को नहीं बताया जा रहा। ऐसे में सड़क चौड़ाई से अधिक की भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही निरस्त की जाए।
नहीं है दूसरा कोई सहारा
किसानों ने बताया कि उनके पास खेती के अलावा कोई सहारा नहीं है। एक्सप्रेस-वे में आने वाले अधिकतर छोटे किसान हैं। नौकरी-पेशा या व्यापार इन किसानों के पास नहीं है। केवल खेती पर ही निर्भर हैं। ऐसे में एक्सप्रेस-वे निकलने के बाद किसानों के पास रोजगार व परिवार पालने का कोई जरिया नहीं बचेगा। उन्होंने सरकार से एक्सप्रेस-वे के पास व्यावसायिक भागीदारी में किसानों को प्राथमिकता देने की भी मांग की। कहा कि यदि सरकार किसानों के हित में निर्णय नहीं करती तो आंदोलन किया जाएगा।