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Big News: दिल्ली के व्यापारियों को पसंद नहीं आया लहसुन, सरकार ने कौडिय़ों के दाम बेचा

बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) में लहसुन की सरकारी खरीद सरकार के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रही है।

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May 02, 2018
Garlic

कोटा . बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) में लहसुन की सरकारी खरीद सरकार के लिए भारी घाटे का सौदा साबित हो रही है। कोटा से खरीदा गया लहसुन बेचने के लिए दिल्ली भेजा गया, लेकिन खरीदार नहीं मिलने से लहसुन को औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है। इससे केन्द्र और राज्य सरकार भी परेशान है। हालांकि चुनावी साल होने के कारण किसानों को खुश रखने के लिए सरकार घाटे में भीे लहसुन की खरीद कर रही है।

हाड़ौती में बाजार हस्तक्षेप योजना में पिछले एक सप्ताह से लहसुन की खरीद चल रही है। बुधवार को भामाशाहमंडी में 14 ट्रॉली लहसुन की खरीद की गई। एमआईएस योजना में लहसुन खरीद की श्रेणी निर्धारित की है। 25 एमएम से अधिक मोटाई वाले लहसुन को सरकार 32 हजार 570 रुए प्रति मीट्रिक टन की दर से खरीद की जानी है। लेकिन राज्य सरकार के दबाव में इससे कम मोटाई के लहसुन को भी खरीदा जा रहा है। कोटा प्रवास के दौरान लहसुन खरीद का मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया था। लेकिन अभी तक प्रदेश के किसानों का एक लाख 54 हजार मीट्रिक टन लहसुन सरकार खरीदेगी। इसके लिए विस्तृत गाइड लाइन जारी कर दी गई है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को बाजार हस्तक्षेप योजना- 2018 (एमआईएस) के तहत लहसुन खरीद के दिशा निर्देश जारी किए हैं। खरीद की अवधि 13 अप्रेल से 12 मई निर्धारित की गई है। एमआईएस योजना में खरीद की सीमा भी तय कर दी है। राज्य सरकार के माध्यम से खरीद होगी।

इस मानक पर होगी खरीद

एमआईएस योजना में लहसुन खरीद की श्रेणी निर्धारित की है। किसानों को गुणवत्ता के आधार पर ही लहसुन के दाम मिलेगी। 25 एमएम से अधिक मोटाई वाले लहसुन को सरकार 32 हजार 570 रुए प्रति मीट्रिक टन की दर से खरीद की जाएगी।

लहसुन को खरीद कर सरकार बाजार में बेचेगी। इसमें बाजार से कम दर पर लहसुन की बिक्री होने पर आधी-आधी राज्य केन्द्र और राज्य सरकार वहन करेगी। खरीदे गए लहसुन का भण्डार सहकारी समितियों के गोदामों, मंडियों आदि जगहों पर किया जाएगा।

Published on:
02 May 2018 08:45 pm