
कोटा. चित्तौडग़ढ़ से झांसी जाने वाले फोरलेन नेशनल हाई-वे 27 को शुरू हुए आठ साल हो गए, लेकिन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने के बाद इसकी एक बार भी ठीक तरीके से मरम्मत नहीं हुई। इससे सड़क पर गड्ढे पड़ चुके हैं। कई जगह सरिए निकल चुके हैं। सड़क ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है। पुलियाओं का गिट्टी-सीमेंट निकल चुका है। लोहे के बाहर निकले सरियों पर गुजरते वाहन पंक्चर हो रहे हैं। ऐसे में वाहन चालकों को बीच राह अटकना पड़ता है। मंगलवार को पत्रिका टीम ने बारां नेशनल हाई-वे 27 का सीमल्या टोल नाके तक जायजा लिया। इस दौरान सड़क क्षतिग्रस्त नजर आई।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने चित्तौड़-झांसी 4 लेन नेशनल हाई-वे को वर्ष 2010 में शुरू किया था। इस हाई-वे की मेंटीनेंस, टोल वसूली का गुजरात की एक कम्पनी को 2011 में 2020 तक का टेंडर दिया था। यह कम्पनी टोल तो लगातार वसूल रही है, मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर रही है।
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मरम्मत की जगह पैबंद
हर बारिश में यह सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती है। इस साल गर्मी में कम्पनी ने मरम्मत कराई थी, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई। कई जगह गिट्टी बिखरी पड़ी है। इससे दुपहिया वाहन चालकों के गिरने का अंदेश रहता है।
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खुल जाते हैं पुर्जे
हाई-वे की जर्जर, गड्ढों भरी सड़क पर हल्के व भारी वाहन फर्राटे मारते हैं। एेसे में वाहनों के पुर्जे ढीले हो जाते हैं। गड्ढों में वाहन चलाने पर कई बार लोडिंग वाहनों के पट्टे-कमानियां टूट जाती हैं। टायर फूट जाते हैं। पहियों के एक्सल टूट जाते हैं।
कम्पनी कराती है सड़क की मरम्मत
वर्ष 2010 से हमारी कम्पनी के पास टोल वसूली का टेंडर है। दिनभर में टोल नाके से करीब 3500 छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इनसे 4 लाख का टोल टैक्स मिलता है। इसमें से कम्पनी सड़क की मरम्मत भी कराती है।
-संजय विजय, सीनियर एक्जीक्यूटिव मैनेजर, एचआर गुजरात इंफ्रा प्रोजेक्ट
इस हाई-वे की हालत बहुत खराब है। यूं कह सकते हैं कि यह देश का सबसे जर्जर हाई-वे है। इसकी समय पर मेंटिनेंस नहीं होती। टोल पूरा वसूला जाता है।
-अब्दुल हमीद गौड़, वाहन चालक
झांसी से आ रहे हैं, महाराष्ट्र जाना
है। पूरी सड़क उखड़ी हुई है। जर्जर सड़क पर कार को बचाकर निकालना पड़ा। कहीं टायर फूट न जाए, नहीं तो दो-तीन घंटे बर्बाद हो जाएंगे।
-सोनाराम चौधरी, वाहन चालक
हाई-वे की हालत तो एेसी हो रही है
कि पूछो मत। जगह-जगह गड्ढे हो रहे हैं। गिट्टी बिखरी हुई है। एेसे में ड्राइवर को गाड़ी गड्ढे बचाकर चलानी पड़ती है।
-भंवरलाल कुशवाहा, वाहन मालिक
टोल तो पूरा लिया जाता है, लेकिन
सड़क की समय पर मरम्मत नहीं होती। एेसे में ट्रकों के टायर फूट जाते हैं। पुर्जे खुल जाते हैं। पार्टी को माल की डिलीवरी समय पर नहीं हो पाती।
-परमानंद महावर, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी