कोटा

Dowry Case Kota: मां बोली- दहेज की आग में जलने से बच गई मेरी बेटी, नाज है मुझे उसके फैसले पर

डॉ. राशि के फैसले के साथ उसका पूरा परिवार खड़ा हो गया है। मां रश्मि ने कहा कि मेरी बेटी दहेज की आग में जलने से बच गई। इससे बड़ी खुशी नहीं हो सकती।

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Dec 04, 2017
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Dowry Case : Returned Barat over Dowry Demand

दरवाजे से बेटी की डोली लौट जाए तो पूरे घर में मातम पसर जाता है, लेकिन डॉ. सक्सेना के परिवार में जश्न का माहौल है। आखिर हो भी क्यों नहीं, उनकी बहादुर बेटी ने दरवाजे पर बारात लेकर खड़े दहेज लोभियों को बैरंग जो लौटा दिया। जिस बेटी ने दुनिया-समाज, इज्जत और बेज्जती को पीछे छोड़ अपनी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला लिया हो तो उसके परिवार वाले उसे अकेला कैसे छोड़ सकते हैं। अपनी बेटी के फैसले पर फक्र जताते हुए डॉ. राशि की मां रश्मि ने कहा कि मेरी बेटी आखरी पलों में दहेज की आग में जलने से बच गई।

डॉ. राशि की मां रश्मि सक्सेना ने बताया कि एक मेट्रीमोनियल साइट के विज्ञापन की मदद से उन्होंने राशि और सक्षम का रिश्ता तय किया था। शुरूआत में सब अच्छा चल रहा था। हम ये साेच कर खुश थे कि बेटी की पढ़ाई पूरी होते ही अच्छा रिश्ता मिल गया। बेटी-दामाद दोनों डॉक्टर हैं, खुशी-खुशी जीवन बिताएंगे। परिवार शिक्षित और संपन्न है तो बेटी को ससुराल में भी कोई तकलीफ नहीं होगी, लेकिन हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेट्रीमोनियल साइट्स के जरिए शादी करना इतना भारी पड़ेगा।

जल्दी में थे लड़के वाले

रश्मि सक्सेना ने बताया कि उन्होंने सक्षम के परिवार से घुलने मिलने की कोशिश की तो वह लोग शादी की जल्दी करने लगे। रिश्ता तय होने के बाद उन्होंने मात्र दो महीने में ही उन्होंने शादी की डेट तय कर दी थी। जैसे-तैसे हमने शादी की तैयारियां की और कोटा के हेरिटेज होटल बृजराज पैलेस में 3 दिसंबर को शादी करने का पूरा इंतजाम किया। 1 दिसंबर काे बारात सहित मेहमानों का आना भी शुरू हो गया, लेकिन दरवाजे पर बारात लाकर इतने बड़े दहेज की मांग सुनते ही हम सदमे में आ गए। एक पल के लिए हमारे मन में यह बात खटकी थी कि लड़के वालों को शादी की जल्दी क्यों कर रहे हैं, लेकिन तैयारियों के चलते उस पर सोचने का मौका ही नहीं मिला।

लड़के की मां ने रखी मांगें

र‍श्मी बताती हैं कि 3 दिसंबर को सुबह अचानक लड़के की मां का फोन आया और जल्द मिलने को कहा। मिलने पर उन्होंने कहा कि आपने सगाई में कुछ नहीं किया। बारातियों का स्वागत भी अच्छे से न कर सभी का अपमान कर दिया। उन्होंने शादी के बाद बरातियों को सोने सिक्के देने की बात कही। इसके बाद तो एक-एक कर तमाम डिमांड सामने आने लगीं। इनका हिसाब जब जोड़ा तो खर्च 1 करोड़ के भी ऊपर जा पहुंचा। जो हमारी हैसीयत के बाहर था। हमने उन लोगों का बताया कि इतना हम नहीं कर सकते, लेकिन एक बार हम बेटी से बात करना चाहते हैं।

Updated on:
05 Dec 2017 11:38 am
Published on:
04 Dec 2017 05:18 pm