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पीएम मोदी की राजस्थान को बड़ी सौगात : 16,403 करोड़ के प्रोजेक्ट से 4 लाइन का होगा यह रेल रूट, प्रदेश के 7 जिलों को मिलेगा फायदा

Nagda-Mathura Rail Project: पीएम मोदी ने राजस्थान को बड़ी सौगात दी है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की हुई बैठक में नागदा-मथुरा तीसरी व चौथी रेल लाइन को मंजूरी दे दी गई। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा राजस्थान को होगा।

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कोटा

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Kamal Mishra

May 05, 2026

Nagda to Mathura Rail Project

Nagda to Mathura Rail Project (Photo-AI)

कोटा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राजस्थान सहित तीन राज्यों के लिए एक महत्वपूर्ण रेल परियोजना को मंजूरी देकर बड़ी सौगात दी है। नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति मिलते ही इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। करीब 16,403 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट न केवल राजस्थान, बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा।

लगभग 568 किलोमीटर लंबा यह रेल मार्ग नागदा से मथुरा तक फैला है, जो दिल्ली-मुंबई हाई डेंसिटी नेटवर्क का अहम हिस्सा माना जाता है। वर्तमान में इस रूट पर ट्रेनों का दबाव काफी अधिक है, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ता है। तीसरी और चौथी लाइन बिछने के बाद इस समस्या में काफी हद तक कमी आएगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारू हो सकेगी। परियोजना को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

राजस्थान के इन जिलों से गुजर रहा रेल रूट

इस रेल लाइन का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरता है, जिससे प्रदेश के कई जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इनमें झालावाड़, कोटा, बूंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर शामिल हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश के उज्जैन, रतलाम और मंदसौर तथा उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले भी इस परियोजना से जुड़ेंगे। खासतौर पर कोटा रेल मंडल के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे यात्री सेवाओं के साथ-साथ माल परिवहन में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

दो अन्य परियोजनाओं को भी मिली हरी झंडी

इसके अलावा दूसरी परियोजना में दक्षिण भारत में गुंतकल-वाडी तीसरी और चौथी लाइन है। वहीं तीसरी परियोजना के तौर पर बुरहवाल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन परियोजना है। इन तीनों प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत 23,437 करोड़ है तथा इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित है।

लॉजिस्टिक क्षमता बढ़ाना प्रोजेक्ट का उद्देश्य

ये प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक क्षमता को बढ़ाना है। नई लाइनों के निर्माण से कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक और इस्पात जैसे जरूरी सामानों के परिवहन में तेजी आएगी। अनुमान है कि इससे हर साल लगभग 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव हो सकेगा।

राजस्थान पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

पर्यटन क्षेत्र को भी इस परियोजना से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और मथुरा-वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से अधिक आसान हो जाएगी। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।

83 लाख लोगों को मिलेगी बेहतर रेल सुविधा

इसके अलावा, यह परियोजना करीब 4,000 से अधिक गांवों और लगभग 83 लाख लोगों को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। निर्माण चरण में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, वहीं प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद संचालन और रखरखाव में भी रोजगार सृजित होंगे। कुल मिलाकर, यह रेल परियोजना राजस्थान के बुनियादी ढांचे और आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।