कोटा

डॉक्टर-इंजीनियरों की फैक्ट्री से अब रोजगार का उत्पादन, कोटा में तैयार 45 स्टार्टअप, 300 करोड़ पार होगा बिजनेस

खाली जेबों में ही ख्वाब खनकते हैं...कोटा के युवाओं की ख्वाब देखने की सलाहियत...उन्हें हकीकत में तब्दील करने का जज्बा और चुनौतियों से जूझने की क्षमता ने इसे साबित कर दिखाया है।

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Mar 12, 2019
डॉक्टर-इंजीनियरों की फैक्ट्री से अब रोजगार का उत्पादन, कोटा में तैयार 45 स्टार्टअप, 300 करोड़ पार होगा बिजनेस

कोटा. खाली जेबों में ही ख्वाब खनकते हैं...कोटा के युवाओं की ख्वाब देखने की सलाहियत...उन्हें हकीकत में तब्दील करने का जज्बा और चुनौतियों से जूझने की क्षमता ने इसे साबित भी कर दिखाया है...यकीं न आए तो कोटा का कोई भी स्टार्टअप उठाकर देख लीजिए। कोटा के युवाओं ने न सिर्फ बाजार की नब्ज को समझा बल्कि मौके को भांप खुद के पैरों पर खड़े होने का दांव तक लगा दिया...दोस्तों ने पॉकिट मनी बचा स्किल डवलप किए और कुछ हजार रुपए से शुरू हुए स्टार्टअप्स को तीन साल में ही नौ दस करोड़ की वैल्युएशन तक पहुंचा दिया।

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दरअसल, डिग्री हासिल करने के बाद कॉलेज से बाहर निकलते ही युवाओं के सामने प्लेसमेंट एजेंसी के चक्कर काटने या फिर रोजगार समाचारों के पन्ने पलटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। एक वैकेंसी के लिए पांच से सात हजार लोगों के बीच मुकाबला होता है। कोटा की तो बात ही छोडि़ए पूरे सूबे में कुल एक फीसदी युवाओं को भी रोजगार मिल जाए तो बड़ी बात होती है। बाकी बचे 99 फीसदी को अपना भविष्य संवारने के लिए खुद जूझना पड़ता है।

ऐसे युवाओं के लिए स्टार्टअप सबसे बेहतर अवसर है, जो अपनी स्किल डवलप कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि सैकड़़ों दूसरे युवाओं के लिए रोजगार का इंतजाम कर सकता है। स्टार्टअप की खूबसूरती यह है कि इसमें शामिल सभी स्टेकहोल्डर्स एक दूसरे का हाथ पकड़ कर सभी को ऊपर उठाने की कोशिश में जुट जाते हैं। साथ ही, कम पढ़े लिखे युवाओं के लिए भी यहां बिजनेस अपॉच्र्यूनिटी क्रिएट हो रही है।

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चुनौतियां हैं तो समाधान भी
स्टार्टअप्स के लिए इन्वेस्टमेंट एक चैलेंज जरूर है, लेकिन इसमें बाकी बिजनेस की तरह लोन के लिए पापड़ नहीं बेलना पड़ते। राज्य सरकार तो मदद कर ही रही है, इसके अलावा कोटा में ही करीब 50 एंजेल इन्वेस्टर्स, वेंचर कैपिटलिस्ट और कई तरह की प्राइवेट फम्र्स भी है जो स्टार्टअप्स में फंडिंग करने के लिए आगे आ रही हैं। स्टार्टअप्स आइडिया बेस्ड यूनिक बिजनेस होने की वजह से प्रतिस्पद्र्धा उतनी नहीं होती। आपकी सर्विस और प्रॉडक्ट को मार्केट करने के लिए आप पूरी तरह से स्वतंत्र होते हो, लेकिन किसी भी स्टार्टअप्स की सफलता उसकी टीम पर ही निर्भर होती है।

ये चैलेंज इसलिए भी बड़ा है, क्योंकि स्टार्टअप्स के लिए को फाउंडर्स और उनके साथ काम करने वाले लोगों के सोचने समझने के नजरिए में फर्क नहीं होना चाहिए। टीम के लिए एक निर्धारित विजन पर कार्य करना जरुरी है क्यूंकि स्टार्टअप्स के मामलों में आपके पास सैकंड चांस जैसी सुविधा नहीं होती है। दूसरा बड़ा चैलेंज नेटवर्किंग का है, क्योंकि कस्टमर तक आप कनेक्ट नहीं कर पा रहे तो सफल नहीं हो सकते। इसलिए युवाओं को एनालिसिस करना होगा कि उनका टारगेट सेगमेंट क्या है और उस तक पहुंचने के लिए सप्लाई चैन कौन सी चुन रहा है। इन्वेस्टर और प्रोमोटर्स की भूमिका भी पहले ही तय करनी होगी, ताकि सफलता के पायदान बिना किसी विवाद के चढ़े जा सके।

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कोटा ही क्यों...
- इंजीनियर और डॉक्टर बनने का ख्वाब लेकर सालाना डेढ़ लाख से ज्यादा युवा आते हैं कोटा
- 1.25 लाख से ज्यादा छात्र रहते हैं अकेले, डोर टू डोर सप्लाई चेन का अच्छा अवसर
- शानदार शैक्षणिक योग्यता के साथ ही संघर्ष और चुनौतियों से निपटने की इनमें होती है गजब की क्षमता
- आईआईटी या नीट जैसे एग्जाम क्वालिफाई करने के बावजूद मैरिट में जगह न बना पाने वालों के लिए बड़ा विकल्प
- इनके स्किल्स टेक्निकली डवलप करना आसान, स्टार्टअप्स के लिए परफेक्ट स्टफ
- जनाब, कोटा की एक और बड़ी खूबसूरत बात है... मुश्किल दौर में हाथ पकड़कर साथ निभाने की
- भामाशाहों का ऐसा फ्रंट डवलप करना आसान जो स्टार्टअप्स में पैसा लगा सकते हैं
- दुनिया के ऐसे इकलौते शहर बनने की क्षमता जो दुनिया भर में बन सकता है स्वरोजगार की मिसाल
- कोटा दुनिया की सबसे घनी आवादी वाला सातवां शहर
- प्रति वर्ग किमी में 12,100 लोगों की आबादी निवास करती है
- सालाना प्रति व्यक्ति औसत आय 52,472 रुपए से ज्यादा, जो बढ़ाती है शहरी क्रय शक्ति
- 69 फीसदी आय मकानों के किराए से ही आती है इसलिए आय बढ़ाने के दूसरे साधनों की चुनौतियां कम
- जिले की 51 फीसदी आबादी बसती है शहर में जो बनाती है ग्राहकों की अच्छी संख्या

Published on:
12 Mar 2019 09:30 am
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