कोटा

रुंआसा होकर बोला कोटा, कितना घोंटोगे मेरा गला, अतिक्रमण से शहर हलकान

शहर में चारों ओर अतिक्रमण की भरमार है, मानो किसी ने कोटा का गला दबा दिया हो। कई जगहों पर 30-40 साल से अवैध कब्जे हो रहे हैं।
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Updated: 20 Dec 2017, 1:31 PM IST
Encroachment

स्वर्ण रजत मार्केट के बाहर व्यापारी से लूट के बाद बढ़ते दबाव के बाद यूआईटी के लवाजमे ने दो दशक पार का अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया लेकिन शहर में यह एेसा अकेला अतिक्रमण नहीं था जो सालों से आबाद हो और समाजकंटकों की शरणस्थली भी। शहर के स्टेशन क्षेत्र, भामाशाहमंडी, ट्रांसपोर्ट नगर में एेसे ही दशकों पुराने कब्जे आम जनजीवन की राह में रोड़े बने हुए हैं।

अतिक्रमियों ने इन इलाकों में स्थाई निर्माण तक करा लिए। ट्रांसपोर्ट नगर में व्यवसायी इनके चलते चोरियों की वारदात के शिकार हो रहे। वहीं स्टेशन क्षेत्र में समाजकंटकों की गैर कानूनी गतिविधियों की शिकायत लोग दर्जनों बार कर चुके लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। कहां कैसे हैं हाल, देखिये इस रिपोर्ट में...
सब्जीमंडी


मस्जिद गली के पीछे लगने वाली सब्जी मंडी में ३० साल से लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। लोगों ने यहां थडि़यां लगा रखी हंै, पक्की दुकाने बना रखी हैं, वहीं दर्जनों लोग पक्के मकान बनाकर भी रह रहे हैं। लोगों ने अतिक्रमण हटाने के लिए दर्जनों बार शिकायत भी दर्ज करा दी लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं नहीं रेंगी। आसपास के लोगों का कहना है कि कई गैर कानूनी गतिविधियों का अड्डा बने हुए हैं ये अतिक्रमण।

मुख्य मार्ग
यहां सबसे बड़ी परेशानी सड़क के किनारे सालों से फलों के ठेले वालों ने अतिक्रमण कर रोड छोटा कर दिया। यहां लगे घंटाघर के आसपास भी सालों से अतिक्रमण हो रहा है। शीतला माता मंदिर के चारों तरफ अवैध रूप से दुकानें संचालित हैं।

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फ्लाईओवर के नीचे
फ्लाईओवर के नीचे भी करीब 50 से अधिक लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। यहां कई लोग एेसे हैं जो थडि़यों व पक्की दुकानें बनाकर ऑफिस संचालित कर रहे हैं। पुलिया के नीचे बिल्डिंग मेटेरियल का ऑफिस चल रहा है तो वहीं भोजनालय भी संचालित है। नजदीक ही कबाडि़यों ने सालों से थडि़यां लगा रखी हैं।

आंदोलन पर खुलती आंखें
कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि व्यापारियों के आंदोलन पर यूआईटी, नगर निगम की आंखें खुलती है। यूंं उन्हें अतिक्रमण नजर नहीं आता। कारोबार करना मुश्किल हो रहा है। यूआईटी, निगम को चाहिए कि बाजारों को अतिक्रमण मुक्त करें।

Updated on:
20 Dec 2017, 1:31 PM IST
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