
बारां. दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में जैन जोड़ला मंदिर में संत आचार्यश्री 108 निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज एवं मेरुदत्त सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत श्री 1008 जिनेन्द्र भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान सम्पन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस अवसर पर डॉ. कैलाशचंद सेठी एवं माणक सेठी को आराधना कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उद्बोधन में मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज ने कहा, "हमारे चातुर्मास की स्थापना तो हो गई है, अब आप सभी श्रावक भी अपने जीवन में चातुर्मास की स्थापना करें। तप, त्याग, संयम, स्वाध्याय और धर्म आराधना के संकल्प के साथ इस पावन काल को सफल बनाएं।" उन्होंने कहा कि चातुर्मास केवल संतों के एक स्थान पर विराजने का समय नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रावक के लिए आत्मशुद्धि, कषायों पर विजय, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नयन का अनुपम अवसर है। यदि प्रत्येक व्यक्ति इस अवधि में एक भी श्रेष्ठ संकल्प को जीवन में उतार ले, तो उसका जीवन धर्ममय बन सकता है। दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विनोद बड़जात्या ने कहा कि चातुर्मास समाज में संस्कार, सद्भाव और धर्म चेतना का महापर्व है। मीडिया प्रभारी ललिता टोंग्या ने बताया कि मंगलवार के इस आयोजन का प्रायोजक जैन सोशल ग्रुप, बारां रहा। ग्रुप के अध्यक्ष शिखरचंद जैन ने समाजजनों का स्वागत करते हुए धर्म आराधना में निरंतर सहभागी बनने का आह्वान किया।