
कोटा .
भाण्डाहेड़ा पंचायत में रहने वाला तीस साल का हरिवल्लभ माली कभी 22 बीघा जमीन का मालिक था। जमीन में पानी नहीं था। राज ने साथ नहीं दिया। सिर पर कर्ज बढ़ता चला गया और आज वह अपने ही खेत में हाळी का काम कर रहा है।
उसे यह खेत सुरेश नागर को बेचना पड़ा। इस इलाके में इतनी विकट स्थित में अन्नदाता खून के आंसू रो रहा है। ऐसी कहानी गांव-गांव में है। लोगों को अब यह सब चौंकाता नहीं है। जानकार बताते हैं कि किसानों की हालात इस कदर बिगड़ चुकी है कि जिन किसानों के 20 से 40 बीघा तक के खेत थे। वे बिक गए और ये किसान अब खुद दूसरों के खेत लेकर मुनाफे पर खेती कर रहे हैं या दूसरों के खेत में हाळी लग रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने इस समस्या को उठाने का जतन तक नहीं किया।
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हालात ऐसे हो गए कि अब किसान मांग करते हैं तो वे इसे राजनीतिक द्वेषता तक बता देते हैं। ग्राम पंचायत चौमा मालियान, भाण्डाहेड़ा, रेलगांव व कुराड़ पंचायतों के अधिकांश किसान कर्ज में डूबे हुए हैं। किसी पर बैंक का कर्ज है तो किसी के सिर साहूकार का। किसी ने रिश्तेदारों से कर्ज लिया तो कोई जमीन गिरवी रखकर कर्ज ले रहा है। एक किसान पर 5 लाख से लेकर 60 लाख तक का कर्ज है। गांव के हर घर में किसान कर्जदार हैं। तकाजा करने वाले हर समय घर पर आ धमकते हैं। किसानों पर कर्ज होने का
एक ही कारण है कि यहां खेतों में पानी रीत गया है। कुछ बोरवेल
चल रहे हैं तो एक से दो घंटा पानी देने के बाद बंद हो जाते हैं। इस पानी में खेती करना घाटे का सौदा हो रहा है।
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बरसात में भी नहीं भर रहे पोंड
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सरकार ने हर खेत में डिग्गी [पोंड] बनाकर खेत को सिंचित करने की योजना बनाई थी, लेकिन वह भी फेल हो गई। 65 बाई 65 का कुंड बनाए जाने पर सरकार 52 हजार रुपए देती थी। बरसात नहीं होने व जमीनों में पानी गहराई तक चले जाने से पोंड भी सूख जाते हैं। खेतों में उस पोंड से सिंचाई नहीं हो रही।
बरसात में कुछ पानी बरसता है तो पोंड थोड़े समय के लिए भर जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसमें भी पानी तल पर जाकर सिमट जाता है।
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किसान मदनलाल ने बताया कि 80 बीघा जमीन बेचकर कर्ज चुकाया है। सारा कर्ज पानी नहीं होने से चढ़ा है। हर बार सोचते हैं कि फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुका देंगे, लेकिन पानी की पर्याप्त मात्रा नहीं होने से फसल की गुणवत्ता खत्म हो गई और फसल कौडिय़ों के भाव जा रही है।
किसान नंदराम मालव ने बताया कि 11 बीघा जमीन थी कई लोगों का कर्ज हो गया तो 5 बीघा जमीन बेच दी। बाकी बची 6 बीघा जमीन में खेती नहीं हो रही, आने वाले समय में ये भी बिक जाएगी। बच्चों की जरूरत, घर का खर्च व खाने के लिए क्या करें कुछ समझ नहीं आता।