
चेचट. मुख्यमन्त्री वसुंधरा राजे प्रदेश में भाजपा शासनकाल में हुए विकास कार्यों को लेकर राजस्थान गौरव यात्रा निकाल रही है, लेकिन क्षेत्र की ताकली बांध सिंचाई परियोजना का निर्माण पूरे कार्यकाल में नहीं हुआ। इसके चलते ताकली बांध के डूब विस्थापित सात गांवों की समस्या ज्यों की त्यों है। यहां के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। अगर सरकार ने समय रहते इनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो मुख्यमन्त्री की गौरव यात्रा का विरोध करेंगे। यह निर्णय मंगलवार को गांव सोहनपुरा के महाकालेश्वर मन्दिर पर आयोजित डूब क्षेत्र के सात गांवों के प्रमुख लोगों की बैठक में लिया गया। गौरव यात्रा का विरोध की रूपरेखा आगामी 8 सितम्बर को आयोजित बैठक में बनाई जाएगी।
बैठक में पहुंचे ताकली बांध डूब क्षेत्र के सात गांवों के ग्रामीणों ने कहा है कि सरकार विकास एवं गौरव का ढिंढोरा पिटती हुई प्रदेश में घूम रही है। ताकली बांध परियोजना से जुड़े लोग बांध निर्माण के लिए कितनी बार आंदोलन कर चुके हैं। डूब विस्थापित ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर सरकार के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के चक्कर लगा लगाकर थक गए, लेकिन उन्हें अभी तक न्याय नहीं मिला।
ताकली बांध निर्माण के चलते डूब क्षेत्र के गांवों में 10 वर्ष से एक भी विकास कार्य नहीं हुआ है। इससे ग्रामीण नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। इसके अलावा ग्रामीणों को उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है जिससे विस्थापित जगह पर मकान बना सके। ताकली बांध का निर्माण नहीं होने से इससे लाभान्वित 40 गांव के लोग भी सूखे की मार झेल रहे हैं। बैठक में ताकली बांध हित संघर्ष समिति के लोगों ने निर्णय लिया कि सरकार समय रहते समस्याओं पर ध्यान नहीं देती है तो मुख्यमंत्री की राजस्थान गौरव यात्रा का विरोध करेंगे।