गीता जयंती महोत्सव का तीसरा दिन, हुआ शोध केन्द्र का उद्घाटन, संतों के प्रवचन
कोटा .
गीता जयंती महोत्सव के तहत गुरुवार को गीता सत्संग आश्रम भवन परिसर में गीता शोध केन्द्र का उदघाटन किया गया। बड़ोदरा से आए गोस्वामी द्वारकेश लाल महाराज ने महाप्रभु मंदिर के शरद बाबा, अयोध्या के संत रामकिशोर शरण दास के सान्निध्य में शोध केन्द्र का लोकार्पण किया। गीता सत्संग आश्रम समिति के पदाधिकारी व अन्य बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
इस मौके पर आयोजित धर्मसभा में गोस्वामी शरद बाबा ने गीता पर प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि गीता पर शोध की आवश्यकता नहीं, यह तो अपने आप में शोधित है। इसमें व्याप्त ज्ञान और विषयों के शोध करने ही आवश्यकता है। शरद बाबा ने गीता को एक सम्पूर्ण ग्रन्थ बताया। यह जीव मात्र के कल्याण के लिए है। भगवान ने अर्जुन को माध्यम बनाकर उपदेशों के जरिये इसमेंं लोगों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। इसमें मानवमात्र के कल्याण के तीन रास्ते कर्मयोग, ज्ञान योग व भक्ति योग बताए गए हैं। शरदबाबा ने कहा कि व्यक्ति स्वार्थ व मोह से दूर रहे तो उसका कल्याण निश्चित है। स्वार्थ से युक्त होकर कार्य कर्ता है उसका कल्याण नहीं हो सकता, लेकिन जो परमार्थ भाव से कर्म करता है, वह मोक्ष को प्राप्त करता है। धर्मसभा में द्वारकेश लाल महाराज ने भी व्याख्यान दिया। आश्रम समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता, संयोजक गिरिराज गप्ता, मंत्री बद्री लाल गुप्ता, उपाध्यक्ष कुंती मूंदड़ा, सह मंत्री आदित्य शास्त्री समेत अन्य ने संतों का उपर्णा पहनाकर स्वागत किया।
हजारों लोगों ने की शिरकत
गीता जयंती महोत्सव में गुरुवार को हजारों लोगों ने गीता ज्ञान को आत्मसात किया, संतों के आशीर्वचन हासिल किए। समारोह में महिलाओं ने भी उत्साह से भाग लिया।
5 हजार पुस्तकें रखी जाएंगी
समिति के प्रबन्धक अनुपम खंडेलवाल ने बताया कि गीता शोध केन्द्र में करीब 5 हजार पुस्तकें रखी जाएंगी। इसमें करीब 2 हजार पुस्तकें गीता पर आधारित हैं। अन्य विषयों पर आधारित पुस्तकें भी हैं। गीता पर कोई भी अध्ययन करना चाहे, तो उसे यहां आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहेगी।