
कोटा . बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीद के आदेश हुए भले ही दिन बीत गए, लेकिन अभी तक खरीद आदेश फाइलों से बाहर नहीं निकले। किसान लहसुन खरीद का इंंतजार कर रहा है। वहीं इस मामले में राजफेड की प्रबंध निदेशक वीना प्रधान का जवाब है कि अभी तक उनके पास खरीद शुरू करने सम्बंधी आदेश नहीं आए है।
रोजाना 10 हजार क्विंटल लहसुन कोटा की मंडियों में बिकने आ रहा है, जिसे किसान औने पौने दामों में बेचने पर मजबूर है। इससे किसान का खर्चा-बट्टा भी नहीं निकल रहा। कर्ज में डूबा किसान गिरे भाव से अवसाद में आकर आत्महत्या कर रहा है। 4 दिन पहले बारां जिले के किसान ने आत्महत्या की, वहीं 2 दिन पहले झालावाड़ के किसान ने जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। जिसकी हालत नाजुक है, जबकि गत वर्ष 6 किसानों को आत्महत्या पर मजबूर होना पड़ा।
पंजीयन में निकल गए 10 दिन
केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्रालय ने 12 अप्रेल को राज्य सरकार के शासन सचिव कृषि के नाम बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीद के स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि 13 अप्रेल से 12 मई की अवधि में 3257 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में 25 एमएम से अधिक मोटाई का लहसुन खरीदा जाए। शासन सचिव के निर्देश पर राजफेड ने किसानों के ऑनलाइन पंजीयन तो शुरू कर दिए, लेकिन खरीद शुरू नहीं की।
पत्रिका न चलाया अभियान
पत्रिका के अभियान के बाद सांसद ओम बिरला ने 25 मार्च को कृषि मंत्री से केंद्र को लहसुन खरीद का प्रस्ताव भेजने की बात कही।
7 अप्रेल को राज्य ने केंद्रीय कृषि कल्याण मंत्रालय, नैफेड को लहसुन खरीद शुरू कराने के लिए पत्र लिखा।
8 अप्रेल को सांसद व विधायक ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से लहसुन खरीद शुरू कराने के लिए वार्ता की।
12 अप्रेल को कृषि कल्याण मंत्रालय के निदेशक शशि भूषण ने राजस्थान सरकार के शासन सचिव कृषि को लहसुन खरीद के आदेश जारी किए। राजफेड ने किसानों के ऑनलाइन पंजीयन शुरू किए।
राजफेड प्रबंध निदेशक वीना प्रधान ने लहसुन खरीद के अभी तक आदेश नहीं आए। हमने केंद्र को पत्र लिखा है। जैसा आदेश मिलेगा, वैसे खरीद की जाएगी।