कोटा

कोटा में मूसलाधार बारिश से नदी-नाले उफने, पुलियाओं पर 2 फीट पानी

कस्बे में बुधवार शाम साढ़े चार बजे करीब मौसम ने अचानक करवट बदली तथा करीब आधे घण्टे झमाझम बारिश हुई। इससे यहां नालियां व नाले उफान पर आ गए।
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Jul 19, 2018
Heavy Rain in Rajasthan
5 घंटे की मूसलाधार बारिश से गुंजाली नदी में आया उफान, रावतभाटा के 8 गांवों का टूटा सम्पर्क

मण्डाना. कस्बे में बुधवार शाम साढ़े चार बजे करीब मौसम ने अचानक करवट बदली तथा करीब आधे घण्टे झमाझम बारिश हुई। इससे यहां नालियां व नाले उफान पर आ गए। सड़कों पर एक से दो फीट पानी जमा हो गया। लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। यहां बस स्टैण्ड से कस्बे में जाने वाले मार्ग पर एक फीट तथा मान्दलिया-मण्डाना सम्पर्क सड़क पर राज का कुआं के निकट पुलिया निर्माण नहीं होने से दो फीट पानी भर गया।

ग्रामीणों का का कहना है कि यहां पर विधायक भवानीसिंह राजावत आए थे। तब उन्हें समस्या से अवगत कराया था। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित कर समस्या का समाधान करने के लिए कहा था, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। बारिश से बिजली बंद हो गई जो देर रात तक बहाल नहीं हो पाई।

गोदल्याहेड़ी में एक घंटे झमाझम

गोदल्याहेड़ी. कस्बे में सुबह से तेज गर्मी के बाद दोपहर को मौसम का मिजाज बदला। आसमान में काली घटाएं छाई और तेज हवा के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ जो एक घंटे तक जारी रहा। लोगों को गर्मी-उमस से राहत मिली वहीं, खेतों में पर्याप्त पानी मिलने से किसानों के चेहरों पर खुशी नजर आई। कस्बे के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पानी भर गया। इधर, अरनिया, मोरपा, दाहरा, कैथोड़ी, ताथेड़, गोदल्याहेड़ी, राजपुरा, किशनपुरा सहित कई गांवों में एक घंटे तेज बरसात हुई।

आधा दर्जन गांवों में झमाझम बरसे मेघ
सुल्तानपुर. क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बुधवार को झमाझम बारिश हुई। यहां दिनभर तेज गर्मी के बाद दोपहर को मौसम का मिजाज बदला और तेज बारिश शुरू हुई जो रुक-रुक कर देर शाम तक जारी रही। कस्बे में शाम 4 बजे से तेज बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी-उमस से राहत मिली। वहीं, नालियों का पानी सड़कों पर आने से गंदगी हो गई। राहगीरों को आवागमन में परेशानी हुई। क्षेत्र के कंवरपुरा, दीगोद, कोटसुवां , मारवाड़ा चौकी सहित कई गांवों में झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे।

Published on:
19 Jul 2018 12:36 am
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45 करोड़ की सड़क एक साल में दूसरी बार टूटी, गुणवत्ता पर सवाल यपाटन मार्ग पर करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22.50 किलोमीटर लंबी सड़क एक वर्ष के भीतर दूसरी बरसात भी नहीं झेल पाई। सड़क एक साल में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सुवासा, बाजड और जमीतपुरा गांव के बीच करीब 15 स्थानों पर डामर जगह-जगह से उखड़ गया है और गिट्टी बाहर निकलने लगी है। क्षतिग्रस्त सड़क पर पैचवर्क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शनिवार को सुवासा कस्बे में विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण विशेष रूप से रात्रि के समय वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अंधेरे में गड्ढे दिखाई नहीं देने से आए दिन दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सार्वजनिक निर्माण विभाग से तत्काल पैचवर्क और सड़क की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है। जानकारी के अनुसार, तालेड़ा से केशोरायपाटन तक सड़क निर्माण के लिए 45 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। निर्माण कार्य 15 अगस्त 2022 से शुरू हुआ था और इसे सितंबर 2023 तक पूरा किया जाना था, लेकिन सड़क के दोनों ओर लगभग डेढ़ मीटर पटरी निर्माण का कार्य अभी भी कई स्थानों पर अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क पर लगभग एक वर्ष पूर्व डामरीकरण किया गया था, लेकिन दिसंबर 2025 में सुवासा, बाजड और जमीतपुरा के बीच करीब 20 स्थानों पर सड़क उखड़ गई थी। उस समय संवेदक द्वारा पैचवर्क कर सड़क की मरम्मत की गई थी, लेकिन मरम्मत कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं रही। परिणामस्वरूप जुलाई 2026 में दूसरी बरसात शुरू होते ही सड़क फिर से उखड़ गई और कई स्थानों पर गिट्टी निकलने लगी है। लगातार टूट-फूट के कारण सड़क धीरे-धीरे बड़े गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब तीन हजार से अधिक छोटे-बड़े व भारी वाहन गुजरते हैं। यह सड़क नेशनल हाईवे 52 व मेगा हाईवे को जोड़ती है। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों, किसानों, मजदूरों और आसपास के गांवह/वें के लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अभिषेक गुर्जर, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, तालेड़ा ने बताया कि तालेड़ा से सुवासा के बीच कुछ स्थानों पर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है और सड़क निर्माण का कुछ कार्य अभी शेष है। संवेदक का पूरा भुगतान अभी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत करने के निर्देश संवेदक को दे दिए गए हैं। सड़क वर्तमान में गारंटी अवधि में है और इसकी मरम्मत संवेदक द्वारा ही कराई जाएगी।