अन्तरराष्ट्रीय गिरोह के सरगनाओं को दबोचने के लिए मिले पुख्ता सबूतों को कोटा पुलिस ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
कोटा . खुशी याद है आपको... दरिंदों की सताई हुई बांग्लादेशी लड़की। उसके जीवन को नर्क बनाने वाले दरिंदों को पुलिस ने खुला छोड़ दिया। बांग्लादेश से लड़कियों की तस्करी कर उन्हें हिंदुस्तान में बेचने और जिस्मफरोशी के धंधे में धकेलने वाले अन्तरराष्ट्रीय गिरोह के सरगनाओं को दबोचने के लिए मिले पुख्ता सबूतों को कोटा पुलिस ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। लापरवाही का हाल यह रहा कि किसी भी आरोपी का मोबाइल सर्विलांस पर भी नहीं लगाया गया।
जिस्मफरोशी के धंधे में धकेली गई बांग्लादेश की नाबालिग लड़की की ओर से 23 जून 2017 को कैथूनीपोल थाने में तहरीर दी गई। इसमें उसने इस रैकेट के सरगना और बांग्लादेशी नागरिक सुल्तान मिर्जा का कच्चा चि_ा खोला था। 'खुशी' (बदला हुआ नाम) ने पुलिस को इस इंटरनेशनल माफिया का फोटो और पता तक दिया था, लेकिन कोटा पुलिस ने इन अहम सबूतों को नजरअंदाज कर दिया।
मोबाइल को भूली पुलिस
खुशी ने सबसे बड़े सबूत के तौर पर कैथूनीपोल पुलिस को अपना मोबाइल दिया था। इसमें सुल्तान मिर्जा समेत पूरे नेटवर्क से जुड़े माफियाओं के फोटो, फोन नंबर, पते और बातचीत के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए किए सौदों की डिटेल तक मौजूद थी, लेकिन पुलिस ने इस मोबाइल को डीकोड करने और उसमें मौजूद सबूतों को रिकॉर्ड पर लेने तक की जरूरत नहीं समझी।
पड़ताल में पता चला कि बांग्लादेशी लड़की ने अन्तरराष्ट्रीय मानव तस्करों के इस गिरोह से जुड़े सभी माफियाओं के मोबाइल नंबर तक पुलिस को उपलब्ध करवाए थे, लेकिन उन नंबरों का कॉल रिकॉर्ड खंगाना तो दूर कोटा पुलिस ने अपराधियों की लोकेशन पता लगाने के लिए सर्विलांस पर भी नहीं लगवाया।
सुल्तान मिर्जा की नहीं की तलाश
कोटा पुलिस ने सुल्तान मिर्जा की पहचान से जुड़े कागजात गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल पुलिस तो दूर मानव तस्करों की तलाश में जुटी राजस्थान पुलिस की स्पेशल विंग तक के साथ साझा नहीं किए। सूत्र बताते हैं कि कोटा पुलिस शुरू से ही यह मान बैठी कि मानव तस्करी से जुड़े सभी सरगनाओं ने अपने ठिकाने और पहचान बदल ली होगी।
अब भी चल रहा खुला धंधा
सुल्तान मिर्जा गिरोह इतना बेखौफ है कि 'खुशी' के पकड़े जाने के बाद भी पुराने मोबाइल नंबरों से खुलेआम धंधा चला रहा है। सुल्तान मिर्जा के दोनों पुराने नंबर अब भी चल रहे हैं। जबकि कोटा में गिरफ्तार हुई प्रिया के एक मोबाइल नंबर को 'राजा बड़ौदा' के नाम पर ट्रांसफर करा लिया है, जो अब उसकी नई पहचान बन चुकी है। इतना ही नहीं राजू को छोड़ विजय, रॉबिन और प्रिया आदि के पुराने नंबरों से यह गिरोह अब भी देशभर में जिस्मफरोशी का धंधा खुलेआम चला रहे हैं।
अपराधियों को मिला वॉकओवर
महावीर नगर विस्तार योजना निवासी प्रिया व कैलाश सैनी, कुन्हाड़ी निवासी अर्जुनसिंह पंवार को गिरफ्तार करने के बाद कोटा पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इन तीनों लोगों को पकडऩे के बाद कोटा पुलिस ने सुल्तान मिर्जा, रॉबिन उल, सागर, अजगर, राजू और विजय के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज किया, लेकिन फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए पकड़े गए तीनों लोगों से सख्ती से पूछताछ तक नहीं की। इससे इस हाई प्रोफाइल इंटरनेशनल सेक्स रैकेट को खुला वॉकओवर मिल गया।
मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल टीम का प्रभारी बनाया गया है, लेकिन मैंने अभी कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। मामले में जितने भी आरोपी फरार हैं, सभी को जल्द से जल्द धर दबोचेंगे।
-श्रीकृष्ण गढ़वाल, सीआई, थाना कैथूनीपोल