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Iran-Israel War: हाड़ौती के कारोबार को बड़ा झटका, ईरान-इराक में चावल का निर्यात ठप, बंदरगाहों पर रुका 4 लाख टन बासमती

Hadoti's Rice Trade: ईरान-इजरायल तनाव का असर अब हाड़ौती के चावल कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ईरान और इराक में निर्यात पूरी तरह ठप होने से बंदरगाहों पर करीब 4 लाख टन बासमती चावल से भरे हजारों कंटेनर अटक गए हैं।
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Apr 01, 2026
Rice Trade
कोटा के एक गोदाम में निर्यात के लिए पैकिंग में रखे हुए बासमती चावल के ढेर (फोटो: पत्रिका)

War Impact On Business: ईरान पर अमरीका-इजरायल के सैन्य हमलों का सीधा असर हाड़ौती क्षेत्र से होने वाले बासमती चावल के निर्यात पर पड़ा है। क्षेत्र से खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर चावल निर्यात किया जाता है, लेकिन ईरान के मौजूदा हालात के कारण यह निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। अब निर्यातकों ने वैकल्पिक बाजारों की तलाश करते हुए अन्य देशों में बासमती चावल भेजना शुरू कर दिया है। इससे पहले गिरे हुए चावल के भाव में अब कुछ सुधार देखने को मिल रहा है।

चावल निर्यातकों के अनुसार, ईरान के प्रमुख बंदरगाह बंदर अब्बास के माध्यम से ईरान और अफगानिस्तान जाने वाली खेप पिछले एक माह से अटकी हुई है। गुजरात के कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों के साथ मुंबई बंदरगाह पर लगभग चार लाख टन बासमती चावल से भरे करीब 3,000 कंटेनर खड़े हैं।

इन कंटेनरों के रखरखाव का खर्च निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ बन रहा है। साथ ही, बीमा प्रीमियम भी बढ़ा दिया गया है, जिससे निर्यात लागत और अधिक बढ़ गई है तथा खाड़ी बाजारों की मांग भी प्रभावित हुई है।

कोटा के चावल निर्यातक नीलेश पटेल के अनुसार, अमरीका-ईरान संघर्ष की शुरुआत में बासमती चावल का निर्यात पूरी तरह बंद हो गया था। युद्ध के लंबा खिंचने के कारण अब निर्यातकों ने दुबई, अबूधाबी सहित अन्य देशों में धीरे-धीरे निर्यात शुरू किया है। इससे बाजार में कुछ सुधार आया है। हालांकि, ईरान और इराक में निर्यात अभी भी पूरी तरह बंद है और बंदरगाहों पर बड़ी मात्रा में चावल फंसा हुआ है।

धान उत्पादन में कोटा संभाग अग्रणी

प्रदेश में धान उत्पादन के मामले में कोटा संभाग प्रथम स्थान पर है। राज्य के कुल धान उत्पादन में हाड़ौती की लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में कीमतों में गिरावट का सबसे अधिक प्रभाव भी इसी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। इन दिनों कोटा और बूंदी की मंडियों में धान की बंपर आवक हो रही है, लेकिन गिरते दामों से किसान परेशान हैं।

80 प्रतिशत चावल होता है निर्यात

हाड़ौती क्षेत्र में उत्पादित लगभग 80 प्रतिशत चावल का निर्यात ईरान और खाड़ी देशों में किया जाता है। वर्तमान स्थिति में बड़ी मात्रा में चावल बंदरगाहों पर अटका हुआ है। जो खेप जहाजों में लोड हो चुकी है, वह भी बीच रास्ते में अटकी हुई है। निर्यात ठप होने से धान (कच्चा माल) और चावल दोनों के दाम प्रभावित हुए हैं। कोटा में धान के भाव पिछले वर्ष की तुलना में 700 से 800 रुपए प्रति क्विंटल तक गिर गए हैं।

  • 1.78 लाख हैक्टेयर में बुवाई
  • 09 लाख मीट्रिक टन उत्पादन
  • 70 फीसदी उत्पादन प्रदेश का कोटा संभाग में
  • 80 फीसदी बासमती चावल होता है निर्यात
Updated on:
01 Apr 2026 07:49 am
Published on:
01 Apr 2026 07:47 am