कोटा

Kota Success Story: गांव का पहला IITian बनेगा ‘जिगर’, पिता का कैंसर से हो गया था निधन, मां ने सिलाई करके बेटे को पढ़ाया

पिता के कैंसर के इलाज में परिवार की सारी जमा पूंजी खत्म हो गई थी, लेकिन मां के संघर्ष और बेटे की मेहनत ने हालात बदल दिए। अब जिगर नायक जेईई एडवांस्ड में सफलता हासिल करने के बाद अपने गांव का पहला IITian बनेगा।

2 min read
Jun 09, 2026
IITian Jigar Nayak
मां-बेटे की फोटो: पत्रिका

IITian Motivational Story: कॅरियर एवं केयर सिटी कोटा का एक बार फिर सामाजिक बदलाव में योगदान सामने आया है। कहानी ओडिशा के गंजम जिले के छोटे से गांव बाकलीकोड़ा की है। एक मां ने जिगर के टुकड़े के लिए हर संघर्ष किया और बेटे का कॅरियर बनाकर गांव और परिवार का नाम रोशन किया। कोटा में दो साल रहकर स्टूडेंट जिगर नायक ने जेईई एडवांस्ड परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 17783 और ओबीसी-एनसीएल कैटेगिरी रैंक 4597 हासिल की है। जेईई मेन में 98.6143 पर्सेन्टाइल स्कोर किया।

जिगर और उसकी मां अपूर्वा ने आर्थिक तंगी, पिता का साया उठ जाना और जिम्मेदारियों के बोझ के बावजूद हार नहीं मानी। अपने सपनों को साकार करने के लिए वह कोटा आया और कोचिंग में एडमिशन लिया। यहां दो साल कड़ी मेहनत करने के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली और जिगर अब अपने गांव और परिवार का पहला आइआइटीयन बनेगा।

पिता को कैंसर, जमा पूंजी खर्च

जिगर के पिता जूरीनाथ गुजरात में टेक्सटाइल इंडस्ट्री में काम करते थे। सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक उसके पिता को कैंसर का पता चला। इलाज में सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। वर्ष 2020 में जिगर के पिता का निधन हो गया। घर की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी और पिता के जाने के बाद परिवार पूरी तरह बिखर गया।

परिवार के साथ पढ़ाई की जिम्मेदारी

जिगर की मां अपूर्वा ने परिवार संभालने के साथ बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाई। उन्होंने गोल्ड लोन लिया और घर-घर से सिलाई का काम लेकर टेलरिंग शुरू की। दिनभर मेहनत कर वे घर का खर्च चलाती और जिगर की पढ़ाई के लिए पैसे जोड़ती।

सोशल मीडिया से मिली JEE की जानकारी

जिगर ने बताया कि 10वीं कक्षा तक उसे जेईई परीक्षा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सोशल मीडिया पर जेईई एग्जाम से जुड़ी वीडियो देखने के बाद उसे पहली बार इस परीक्षा के बारे में पता चला, तभी उसके मन में आइआइटीयन बनने का सपना जागा। उसने तय किया कि वह पढ़ाई के दम पर अपनी मां की जिंदगी बदलकर रहेगा। जिगर कोटा आया और पिछले दो वर्षों तक रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में तैयारी की। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसे 11वीं और 12वीं कक्षा में फीस में छूट भी मिली।

परिवार के भविष्य के लिए मेहनत

जिगर का एक छोटा भाई भी है, जो फिलहाल सातवीं कक्षा में पढ़ रहा है। जिगर ने बताया कि मैं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के भविष्य के लिए मेहनत कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि आइआइटी पूरी करने के बाद मेरी मां को संघर्ष न करना पड़े और छोटे भाई की पढ़ाई भी बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।

Published on:
09 Jun 2026 01:21 pm