कोटा

Mahant Devanand Maharaj Murder Case : पुजारी सहित 7 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश, 10 सितंबर को होगी सुनवाई

Mahant Devanand Maharaj Murder Case : कोटा के बोरखेड़ा थाना पुलिस ने चन्द्रेसल मठ के महन्त देवानंद महाराज की हत्या के बहुचर्चित प्रकरण में अनुसंधान पूरा कर पुजारी सहित 7 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है। सुनवाई के लिए 10 सितंबर की पेशी तय की है।
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Sep 08, 2026
kota mahant devanand maharaj murder presented challan against 7 accused
Mahant Devanand Maharaj Murder Case: महंत के सोशल मीडिया हैंडल से ली गई फाइल फोटो

Mahant Devanand Maharaj Murder Case : कोटा के बोरखेड़ा थाना पुलिस ने चन्द्रेसल मठ के महन्त देवानंद महाराज की हत्या के बहुचर्चित प्रकरण में अनुसंधान पूरा कर पुजारी सहित सात आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया है। न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई के लिए 10 सितंबर की पेशी तय की है। इसी प्रकरण में एक अन्य नाबालिग के खिलाफ भी पुलिस ने चालान पेश किया है, जिसे निरुद्ध किया गया था।

सीआइ अजीत बागडोलिया ने बताया कि यह घटना 5 जून की रात को घटित हुई थी। अज्ञात लोगों ने मठ के कक्ष में सो रहे महन्त देवानंद महाराज पर चाकुओं से गोद कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने 6 जून को मठ के कोषाध्यक्ष ब्रजमोहन गुर्जर की रिपोर्ट पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की जांच शुरू की।

गहन जांच के बाद, पुलिस ने इस प्रकरण में संतोष कुमार राय, पूर्व संत नन्दनवन उर्फ नन्हें कुमार, महावीर प्रसाद पारेता, आदित्य वर्मा एवं उसकी पत्नी मीकल जॉर्ज, अंकित बैरवा और पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया। इस पूरे प्रकरण को पुलिस ने केस ऑफिसर स्कीम में लिया है। अनुसंधान पूरा होने के बाद पुलिस ने पुजारी सहित इन सात आरोपियों एवं निरुद्ध किए गए नाबालिग के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया है।

हत्या मामले की इनसाइड स्टोरी

कोटा में चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या के मामले की इनसाइड स्टोरी कुछ इस तरह है। हत्या के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए दो एएसपी, तीन डीवाईएसपी, सात पुलिस निरीक्षकों और करीब 100 पुलिसकर्मियों की विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई।
जांच में सामने आया कि करीब 1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ के नाम लगभग 750 बीघा जमीन और 4.33 करोड़ रुपए की संपत्ति है। पुलिस के अनुसार, पुरानी कार्यकारिणी से जुड़े अधिवक्ता संतोष राय ट्रस्ट के संचालन पर नियंत्रण चाहता था। वहीं महंत देवानंद नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया था।

इसी के बाद उसने अपने करीबी आदित्य वर्मा के जरिए हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार, शक से बचने के लिए संतोष राय घटना से पहले जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने भर्ती हो गया था, ताकि हत्या के समय खुद को शहर से दूर साबित कर सके। जांच में सब कुछ साफ हो गया।

Updated on:
08 Sept 2026 07:57 pm
Published on:
08 Sept 2026 07:57 pm