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कोटा मेडिकल कॉलेज में मौतों के बाद बड़ी कार्रवाई, प्रदेश में 24 तरह की दवाइयों पर लगी रोक, ग्लूकोस पर भी पाबंदी

कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की हुई मौत के बाद सैंपल के लिए भेजी गई 24 तरह की दवाइयों पर रोक लगा दी गई है। पूरे प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में इन दवाओं के इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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May 09, 2026
Kota Medical College
प्रतीकात्मक तस्वीर (एआई जेनरेटेड)

कोटा। मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में अब बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया गया है। ड्रग कंट्रोल विभाग ने एहतियातन 24 प्रकार की दवाइयों और मेडिकल उपकरणों के उपयोग, बिक्री और सप्लाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। इनमें ऑपरेशन और प्रसूताओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन, ग्लूकोस बोतल, आईवी सेट, सिरिंज और कैथेटर जैसे जरूरी सामान शामिल हैं।

ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने इस संबंध में राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) और प्रदेशभर के दवा विक्रेताओं को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कहा है कि जिन दवाइयों और उपकरणों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, उनका उपयोग फिलहाल किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में नहीं किया जाएगा।

आगामी आदेश तक दवाओं पर बैन

जानकारी के अनुसार, जिन 24 दवाइयों और उपकरणों पर रोक लगाई गई है, उनमें से 15 दवाइयां मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत RMSCL की ओर से कोटा मेडिकल कॉलेज को सप्लाई की गई थीं। वहीं 9 अन्य दवाइयां और उपकरण अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर खरीदकर मरीजों के इलाज में उपयोग किए थे। इन सभी के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए हैं और रिपोर्ट आने तक इनकी सप्लाई व उपयोग बंद रहेगा।

मौत के बाद मामले ने पकड़ा तूल

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत हो गई थी, जबकि अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की शिकायत सामने आई थी। मामले ने तूल पकड़ा तो चिकित्सा विभाग ने उच्चस्तरीय जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही सामने आने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई।

इन लोगों पर हुई कार्रवाई

इस मामले में यूटीबी पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया गया, जबकि सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार सहित दो नर्सिंग कर्मियों को निलंबित किया गया। इसके अलावा वार्ड प्रभारी और अन्य चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। जांच में सामने आया कि पोस्ट गायनिक वार्ड में वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं थे और उपचार की जिम्मेदारी रेजिडेंट डॉक्टरों के भरोसे चल रही थी।

मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर क्या बोले?

मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की गहन जांच करवाई जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वहीं कांग्रेस ने भी इस मामले में चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।

Updated on:
09 May 2026 07:18 pm
Published on:
09 May 2026 07:18 pm