
जयपुर SMS से डॉक्टरों की टीम पहुंची (पत्रिका फोटो)
Kota Maternity Case: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपचार के दौरान प्रसूताओं का स्वास्थ्य बिगड़ने के मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने घटना की पूरी जानकारी लेकर प्रसूताओं के उपचार में सहयोग के लिए सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज से चार विशेषज्ञ चिकित्सकों का दल तत्काल कोटा भेजने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही प्रकरण की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच करने के भी निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि घटना के तुरंत बाद इन प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कोटा में ही सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (एसएसबी) के नेफ्रोलॉजी विभाग में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है।
सभी प्रसूताओं की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रसूताओं के उपचार में सहयोग के लिए सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर से 4 विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को कोटा भेजा गया है।
इनमें निश्चेतना विभाग के डॉ. निहार शर्मा, मेडिसिन विभाग के डॉ. सुनील कुमार महावर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉ. पवन अग्रवाल, नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव कुमार शर्मा शामिल हैं।
यह टीम मौके पर पहुंचकर उपचार एवं जांच प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग करेगी तथा पूरे मामले का विस्तृत मूल्यांकन करेगी। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि प्रकरण की पूरी जांच करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं। दोषी अधिकारियों एवं कार्मिकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ने को लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। प्रसूता रागिनी के पति लोकेश मीणा ने कहा कि समय रहते उचित इलाज नहीं मिलने से स्थिति लगातार गंभीर होती गई।
लोकेश के अनुसार, 4 मई की सुबह रागिनी को डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह 11:43 बजे सिजेरियन हुआ। ऑपरेशन के बाद उसे गायनिक वार्ड में शिफ्ट किया गया। इस दौरान ब्लड की कमी होने पर रक्त चढ़ाया और यूरिन बैग भी बदला गया, लेकिन शाम तक यूरिन नहीं आने पर भी स्टॉफ ने गंभीरता नहीं दिखाई।
बार-बार शिकायत के बावजूद डॉक्टरों ने तत्काल ध्यान नहीं दिया। मरीज दर्द से कराहती रही, वहीं नवजात को समय पर फीडिंग भी नहीं कराई गई। रात करीब डेढ़ बजे डॉ. सुमन ने यूरिन सैंपल देने की बात कही, लेकिन इमरजेंसी जांच का मना करते हुए सुबह तक इंतजार करने को कहा।
लोकेश के मुताबिक, रात में ही उन्हें गड़बड़ी का अंदेशा हो गया था। ड्यूटी बदलने के बाद आई डॉ. नव्या ने सोनोग्राफी कराने की सलाह देते हुए नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट करने की बात कही, तब किडनी में इंफेक्शन की जानकारी सामने आई। परिजनों का आरोप है कि उन्हें समय पर इसकी जानकारी नहीं दी गई।
मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी और जांच भी सीमित रखी। बाद में जब अन्य प्रसूताओं के साथ भी ऐसी घटनाएं सामने आने लगीं, तब अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और उन्हें शिफ्ट किया गया।
वहीं, रागिनी के भाई विकास ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिम्मेदारों खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इधर, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. निलेश जैन ने बताया कि पांच प्रसूताओं में से तीन की हालत स्थिर है और दो की स्थिति में सुधार है।
मृतक पायल की ननद टीना ने बताया कि पायल का प्रसव 4 मई को दोपहर में हुआ था। इसमें बेटे का जन्म हुआ। उसके बाद रात को तबीयत बिगड़ी और मंगलवार तड़के दम तोड़ दिया। चिकित्सकों का कहना है कि अचानक बीपी डाउन हो गया, उन्हें घबराहट और गर्मी लगने लगी थी।
इमरजेंसी में भी ले जाया गया, लेकिन कुछ नहीं हो सका। इसके बाद हम शव लेकर आ गए। पायल की यह दूसरी डिलीवरी थी। पहली डिलीवरी में नवजात की मौत हो गई थी।
कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गुरुवार को एक और प्रसूता की मौत हो गई। अब तक इस मामले में कुल दो प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। गुरुवार को मृत प्रसूता की पहचान ज्योति वर्मा पत्नी रवि नायक के रूप में हुई है। रवि ने बताया कि उसने अपनी पत्नी को 4 तारीख को अस्पताल में भर्ती कराया था।
ऑपरेशन से डिलीवरी होने के बाद उसे ऊपर वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सुबह उसे सांस लेने में तकलीफ और घबराहट हुई, जिसके बाद उसे एनआईसीयू में भर्ती किया गया।
रवि का आरोप है कि अस्पताल में उसे कोई गलत डोज दे दी गई, जिससे उसकी किडनी फेल हो गई। उसने यह भी बताया कि अस्पताल में उसके साथ-साथ अन्य मरीजों के साथ भी ऐसा ही हुआ है। रवि का कहना है कि कुल 12 मरीजों में से 6-7 मरीजों की हालत खराब है। डॉक्टरों ने रवि को बताया है कि अब उसकी पत्नी के पास केवल 2 घंटे का समय है और उसे अपने परिवार को बुला लेने के लिए कहा गया है। यह उनका पहला बच्चा है और उनकी शादी को अभी केवल एक साल ही हुआ है।
नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत ज्यादा खराब होने पर एक महिला की मौत हो गई, जबकि पांच महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई। सभी प्रसूताओं का ब्लड प्रेशर कम हो गया, प्लेटलेट्स गिरने लगी और यूरिन आना बंद हो गया।
महिलाओं की स्थिति लगातार गंभीर होने लगी, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन में सर्जरी हुई गया। महिलाओं को रातों-रात एसएसबी ब्लॉक के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। बुधवार सुबह मामला सामने आने के बाद विधायक, अन्य प्रस्तुतियां भी अस्पताल पहुंचे। एसएसबी ब्लॉक में पहुंचने पर भावुक कर देने वाला नजारा सामने आया। जहां मासूम नवजात अपने रिश्तेदारों की गोद में बिलख रहे थे।
इन बच्चों की मां अंदर आईसीयू में गंभीर हालत में भर्ती हैं। रिश्तेदारों इन नवजात बच्चों को चुप कराने की कोशिश करते नजर आए, कोई गोद में लेकर इधर-उधर घूम रहा था, उनके बताए पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा साफ दिख रहा था।
कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने बुधवार को नए अस्पताल पहुंचकर अस्वस्थ हुई प्रसूताओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उन्हें गहन चिकित्सा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रसूताओं और नवजात शिशुओं का पूरा ध्यान रखा जाए और 24 घंटे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी होनी चाहिए।
एक ही वार्ड में विभिन्न महिलाओं के संक्रमित होने को गंभीर घटना बताते हुए उन्होंने प्रभावी जांच करवाने को कहा, ताकि ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो। इस दौरान उन्होंने प्रसूताओं के परिजनों से भी बात तथा उन्हें किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत अवगत कराने को कहा। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मंत्री व कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल ने प्रसूता की मौत के मामले में चिंता जताते हुए कहा कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था बदहाल और भगवान भरोसे है। प्रसूता की मौत लिए सरकार जिम्मेदार है।
डोटासरा ने ट्वीट कर न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने व इलाज के दौरान एक की मृत्यु की खबर को अत्यंत दुखदायी व पीड़ादयक बताया। इलाज के दौरान घोर लापरवाही अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। भाजपा सरकार में मरीजों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
उधर, धारीवाल ने बयान जारी कर कहा कि प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। अस्पतालों में न तो पर्याप्त संसाधन हैं, न ही जिम्मेदाराना रवैया। पूरे मामले में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्पष्ट जांच होनी चाहिए। पीड़ितों को सरकार की ओर से उचित मुआवजा देने की मांग की।
Updated on:
07 May 2026 11:43 am
Published on:
07 May 2026 10:46 am
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